वॉशिंगटनः वॉशिंगटन डीसी में उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर साझा की गई एक एआई से बनी तस्वीर को हटा दिया। इस तस्वीर में उन्हें यीशु मसीह के रूप में दिखाया गया था।
यह तस्वीर बिना किसी कैप्शन के पोस्ट की गई थी। इसमें ट्रंप सफेद कपड़े और लाल पट्टी पहने हुए एक व्यक्ति को ठीक करते हुए नजर आ रहे थे। उनके आसपास सैनिक, एक नर्स और अन्य लोग भी दिखाई दे रहे थे। तस्वीर में अमेरिकी झंडा, उड़ता हुआ ईगल और सैन्य विमान जैसे कई प्रतीक भी शामिल थे।
जैसे ही यह पोस्ट सामने आई, सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। बढ़ते विवाद के बाद इस तस्वीर को हटा दिया गया लेकिन इसे हटाने की वजह को लेकर ट्रंप की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई।
यह मामला उस समय सामने आया जब ट्रंप और पोप लियो चौदहवें के बीच बयानबाजी तेज हो गई थी। ट्रंप ने अपने पोस्ट में दावा किया कि अगर वह राष्ट्रपति नहीं बनते तो पोप की नियुक्ति नहीं होती। उन्होंने पोप को अपराध की रोकथाम और विदेश नीति के मामलों में कमजोर बताया।
ट्रंप ने यह भी कहा कि पोप को राजनीति में हस्तक्षेप करने के बजाय अपने धार्मिक कार्यों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने पोप के भाई लुई की तारीफ करते हुए कहा कि वह उनकी सोच को बेहतर समझते हैं।
पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने पोप के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह उनके काम से संतुष्ट नहीं हैं। वहीं पोप लियो चौदहवें ने इन बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए साफ कहा कि वह किसी राजनीतिक विवाद में नहीं पड़ना चाहते। उन्होंने शांति और संवाद पर जोर देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य दुनिया में शांति स्थापित करना है।
पोप ने यह भी कहा कि धर्म का उपयोग राजनीति के लिए नहीं किया जाना चाहिए और वह अपने मिशन के तहत शांति और भाईचारे का संदेश देते रहेंगे।
इस बीच यूनाइटेड स्टेट्स कॉन्फ्रेंस ऑफ कैथोलिक बिशप्स ने भी ट्रंप के बयानों की आलोचना की। संगठन के अध्यक्ष आर्चबिशप पॉल एस. कोकली ने इन टिप्पणियों को अनुचित और समाज को बांटने वाला बताया।