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पाकिस्तान में वार्ता के बीच ईरान का संदेश-राष्ट्रीय हितों पर समझौता नहीं, “साहस से करेंगे बातचीत”

राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का प्रतिनिधिमंडल को समर्थन; इस्लामाबाद में US-ईरान-पाकिस्तान की उच्चस्तरीय वार्ता पर टिकी नजर।

By श्वेता सिंह

Apr 11, 2026 23:53 IST

नई दिल्लीः पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में चल रही अहम कूटनीतिक वार्ता (डिप्लोमैटिक टॉक्स) के बीच ईरान ने अपने रुख को साफ करते हुए कहा है कि वह किसी भी हाल में अपने राष्ट्रीय हितों (नेशनल इंटरेस्ट) से समझौता नहीं करेगा। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन (Masoud Pezeshkian) ने स्पष्ट किया है कि उनका प्रतिनिधिमंडल “साहस के साथ बातचीत (Negotiations)” करेगा और देश की संप्रभुता व हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।

नई दिल्ली स्थित ईरान के दूतावास (Embassy) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर राष्ट्रपति का संदेश साझा करते हुए बताया कि ईरानी टीम पूरी प्रतिबद्धता के साथ वार्ता में शामिल है। संदेश में यह भी कहा गया कि बातचीत का परिणाम चाहे जो भी हो, सरकार अपने नागरिकों की सेवा में कोई कमी नहीं आने देगी और हर परिस्थिति में जनता के साथ खड़ी रहेगी।

उच्चस्तरीय वार्ता पर टिकी नजर

इस्लामाबाद में अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान के बीच त्रिपक्षीय संघर्ष विराम वार्ता (सीजफायर टॉक्स) जारी है। इसे 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद वॉशिंगटन और तेहरान के बीच सबसे महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय बातचीत माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, औपचारिक बातचीत शुरू होने से पहले ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने एक रणनीतिक बैठक (स्ट्रैटेजिक मीटिंग) कर अपने एजेंडे और प्राथमिकताओं को अंतिम रूप दिया। यह संकेत देता है कि ईरान इस वार्ता को गंभीरता से लेते हुए पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरा है।

कूटनीतिक हलचल और लगातार बैठकों का दौर

वार्ता से पहले कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे डी वेंस (JD Vance) ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात कर क्षेत्रीय हालात और वार्ता की दिशा पर चर्चा की।

वहीं, ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागर गालीबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने भी पाकिस्तानी नेतृत्व के साथ बैठकें कर आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श किया।

इस्लामाबाद का सेरेना होटल (Serena Hotel) इस पूरी कूटनीतिक गतिविधि का केंद्र बना हुआ है, जहां कड़ी सुरक्षा के बीच अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की आवाजाही जारी है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जे डी वेंस (JD Vance) कर रहे हैं, जबकि उनके साथ अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद हैं।

“मेक या ब्रेक” मानी जा रही है वार्ता

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस बातचीत को “मेक या ब्रेक” यानी निर्णायक करार दिया है। माना जा रहा है कि इस वार्ता का असर न सिर्फ अमेरिका और ईरान के रिश्तों पर पड़ेगा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) की स्थिरता पर भी इसका प्रभाव दिखेगा।

यह वार्ता 8 अप्रैल को घोषित संघर्षविराम (सीजफायर) को स्थिर करने और भविष्य की क्षेत्रीय सुरक्षा (रीजनल सिक्योरिटी) की दिशा तय करने के उद्देश्य से हो रही है।

ईरान का सख्त लेकिन संतुलित संदेश

ईरान की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन किसी भी तरह के दबाव में आने वाला नहीं है। राष्ट्रपति पेजेशकियन के बयान से साफ है कि ईरान एक तरफ कूटनीतिक समाधान चाहता है, तो दूसरी तरफ अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है।

इससे पहले ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ भी कह चुके हैं कि वार्ता का परिणाम काफी हद तक अमेरिका के रुख पर निर्भर करेगा।

इस्लामाबाद में चल रही यह त्रिपक्षीय वार्ता मौजूदा वैश्विक हालात में बेहद अहम मानी जा रही है। एक ओर जहां सभी पक्ष तनाव कम करने की कोशिश में हैं, वहीं ईरान का स्पष्ट संदेश यह दर्शाता है कि वह बातचीत में मजबूती के साथ हिस्सा ले रहा है। आने वाले दिनों में इस वार्ता के नतीजे क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।

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