नई दिल्ली/पटना: बिहार की राजनीति में अहम बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को बीजेपी विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद अब उनके मुख्यमंत्री बनने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। राज्य मंत्री दिलीप जायसवाल ने मंगलवार को जानकारी दी कि जल्द ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की विधायक दल की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें उनके नाम की औपचारिक घोषणा की जाएगी।
जायसवाल ने कहा कि इस बैठक के बाद सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे और बिहार में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री बनेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह फैसला गठबंधन के स्तर पर लिया जा रहा है।
वहीं, बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी ने इस निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि बिहार में मुख्यमंत्री पद पहले भी एनडीए के पास था और आगे भी रहेगा। उनके मुताबिक यह फैसला किसी एक पार्टी का नहीं बल्कि गठबंधन की एकजुटता को दर्शाता है।
सम्राट चौधरी ने विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बीजेपी ने उन्हें जीवन में कई अवसर दिए हैं और वे पार्टी नेतृत्व के प्रति आभारी हैं। उन्होंने कहा कि वे देशहित को सर्वोपरि रखते हुए विकास कार्यों को आगे बढ़ाएंगे और पार्टी की प्राथमिकताओं के अनुरूप काम करेंगे।
करीब 30 वर्षों से सक्रिय राजनीति में रहे चौधरी 2015 से बीजेपी के साथ जुड़े हुए हैं और अब वे बिहार में पार्टी के पहले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं।
यह राजनीतिक बदलाव उस समय आया है जब बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने 21 साल तक पद पर रहने के बाद इस्तीफा दे दिया। नीतीश कुमार गठबंधन राजनीति के कुशल खिलाड़ी माने जाते रहे हैं और उनके नेतृत्व में एनडीए ने लंबे समय तक बिहार में सत्ता संभाली। सम्राट चौधरी ने भी उनके अनुभव की सराहना करते हुए कहा कि उनसे सरकार चलाने, सुशासन स्थापित करने और लोकतंत्र को मजबूत करने की कई बातें सीखने को मिली हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के विजन और नीतीश कुमार के समृद्ध बिहार के लक्ष्य को साथ लेकर आगे बढ़ने की बात कही। नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना उनके उस लंबे समय से चले आ रहे लक्ष्य को पूरा करता है, जिसमें वे भारत की हर प्रमुख विधायी संस्था बिहार विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा का हिस्सा बनना चाहते थे।
इस पूरे घटनाक्रम के साथ ही बिहार की सत्ता अब प्रभावी रूप से बीजेपी के हाथों में जाती नजर आ रही है, जो आने वाले चुनावों से पहले राज्य की राजनीति में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव माना जा रहा है।