लखनऊः पश्चिम बंगाल में चुनाव में अब दो सप्ताह से भी कम समय बचा है, लेकिन राज्य में अभी भी चुनाव आयोग की ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष संशोधन की प्रक्रिया जारी है। इस प्रक्रिया में लगभग 91 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिसको लेकर विवाद बना हुआ है। हालांकि पश्चिम बंगाल की तुलना में उत्तर प्रदेश में इससे भी कहीं अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। वहां जारी अंतिम मतदाता सूची के अनुसार 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम दर्ज हैं। ‘आजतक’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक आगामी विधानसभा चुनाव में यह सूची BJP के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
BJP के गढ़ों को लगा झटका
रिपोर्ट के अनुसार जिन इलाकों को BJP का मजबूत गढ़ माना जाता है, वहीं सबसे अधिक मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। राजधानी लखनऊ में लगभग 23% मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। गाज़ियाबाद में भी 20% से अधिक नाम कटे हैं। इसके अलावा कानपुर, नोएडा और मेरठ जैसे शहरों में करीब 18–19% मतदाताओं के नाम अंतिम सूची से बाहर हो गए हैं।
मुस्लिम बहुल ज़िलों में राहत
दूसरी ओर, मुस्लिम बहुल ज़िलों में नाम कटने की दर अपेक्षाकृत कम रही है। बिजनौर, मुरादाबाद और सहारनपुर जैसे ज़िलों में औसतन 10–12% मतदाताओं के नाम ही हटाए गए हैं।
गेरुआ खेमे में चिंता
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता सूची के ये आंकड़े BJP के लिए चेतावनी संकेत हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही आशंका जता चुके थे कि SIR प्रक्रिया में BJP समर्थकों के नाम अधिक कट सकते हैं और अंतिम आंकड़ों ने इस आशंका को सही साबित किया है। ऐसे में आगामी चुनाव से पहले पार्टी को अपनी रणनीति पर फिर से काम करना पड़ सकता है।