नई दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर निर्यात शुल्क में भारी वृद्धि की है ताकि देश के भीतर ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति बनी रहे और निर्यात को हतोत्साहित किया जा सके।
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार डीजल पर निर्यात शुल्क 150 प्रतिशत से अधिक बढ़ाकर प्रति लीटर 21.5 रुपये से 55.5 रुपये कर दिया गया है। इसी तरह ATF पर शुल्क 29.5 रुपये से बढ़ाकर 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं पेट्रोल पर निर्यात शुल्क अभी भी शून्य रखा गया है।
सरकार के इस फैसले के पीछे मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल की बढ़ती कीमतें हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक ईंधन संकट के चलते कीमतों में तेजी आई है। इससे कंपनियां अधिक मुनाफे के लिए विदेशों में निर्यात बढ़ाना चाहती है जिससे देश के भीतर आपूर्ति कम होने का खतरा पैदा हो गया है।
इस स्थिति को देखते हुए सरकार चाहती है कि रिफाइनरी पहले घरेलू मांग को पूरा करें। इसी उद्देश्य से निर्यात शुल्क बढ़ाकर निर्यात को कम करने की कोशिश की जा रही है।
इससे पहले 27 मार्च को केंद्र सरकार ने पहली बार डीजल और ATF पर निर्यात शुल्क लगाया था। उस समय भी वैश्विक बाजार में ईंधन की कमी कीमतों में वृद्धि और चीन द्वारा निर्यात सीमित करने से दबाव बना हुआ था। सरकार ने स्पष्ट किया था कि यह कदम ‘विंडफॉल गेन’ को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है ताकि कंपनियां ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतों का अनुचित लाभ न उठा सकें।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डीजल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में निर्यात को हतोत्साहित कर देश के भीतर आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार का प्रमुख लक्ष्य है।
कुल मिलाकर यह फैसला देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के बीच घरेलू बाजार को स्थिर बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।