🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

सुरों की महान हस्ती ने कहा दुनिया को अलविदा! आशा भोसले नहीं रहीं,: भारतीय संगीत जगत ने खोई बहुमुखी आवाज़

मल्टी-ऑर्गन फेल्योर से 92 वर्ष की आयु में निधन, 12,000 से अधिक गीतों की समृद्ध विरासत छोड़ गईं

By डॉ. अभिज्ञात

Apr 12, 2026 13:29 IST

मुंबई: भारतीय संगीत जगत की दिग्गज और बेहद बहुमुखी आवाज़ मानी जाने वाली आशा भोसले का रविवार को निधन हो गया। 92 वर्ष की आयु में उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली, जिससे भारतीय सिनेमा और संगीत की दुनिया में शोक की लहर फैल गई है।


सुरों की मलिका का निधन

अस्पताल के डॉ. प्रतीत समदानी ने उनके निधन की पुष्टि करते हुए बताया कि आशा भोसले का देहांत मल्टी-ऑर्गन फेल्योर के कारण हुआ। उन्होंने कहा, “आशा भोसले ने आज ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली।”


अस्पताल में भर्ती के बाद बिगड़ी हालत

जानकारी के अनुसार उन्हें शनिवार शाम अत्यधिक थकान और सीने में संक्रमण के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इससे पहले उनकी पोती ज़नाई भोसले ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर उनके अस्पताल में भर्ती होने की पुष्टि की थी और परिवार की निजता बनाए रखने की अपील की थी। उन्होंने कहा था, “मेरी दादी आशा भोसले को अत्यधिक थकान और सीने में संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया है... उनका इलाज जारी है और उम्मीद है कि सब ठीक होगा।”


बचपन से शुरू हुआ संगीत सफर

1933 में जन्मीं आशा ने बहुत कम उम्र में ही अपने संगीत करियर की शुरुआत कर दी थी। 1950 के दशक में उन्होंने पहचान बनानी शुरू की और आगे चलकर वह दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित प्लेबैक सिंगर्स में शामिल हो गईं।


आठ दशकों तक संगीत पर छाप

आठ दशकों से अधिक लंबे करियर में उन्होंने हजारों गीत रिकॉर्ड किए। उनकी आवाज़ को चंचल, भावपूर्ण और बेहद बहुमुखी माना जाता था, जिसने भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर के संगीत प्रेमियों को गहराई से प्रभावित किया।


हर शैली में महारत

उन्होंने शास्त्रीय संगीत, ग़ज़ल, कैबरे, पॉप और लोक संगीत सहित कई शैलियों में अपनी आवाज़ दी। उनकी बहुमुखी प्रतिभा ने उन्हें हर तरह के संगीत में अलग पहचान दिलाई और भारतीय सिनेमा के संगीत को नई दिशा दी।


बड़े सितारों की बनी आवाज़

उन्होंने मीना कुमारी, मधुबाला, जीनत अमान, काजोल, उर्मिला मातोंडकर के साथ-साथ दक्षिण भारतीय अभिनेत्रियों पद्मिनी और वैजयंतीमाला के लिए भी अपनी आवाज़ दी।


यादगार गीतों की विरासत

उनके कई गीत आज भी बेहद लोकप्रिय हैं, जिनमें ‘अभी ना जाओ छोड़ कर’, ‘इन आंखों की मस्ती’, ‘दिल चीज़ क्या है’, ‘पिया तू अब तो आजा’, ‘दुनिया में लोगों को’, ‘ज़रा सा झूम लूं मैं’, ‘मेरा कुछ सामान’ और ‘चुरा लिया है तुमने’ जैसे गीत शामिल हैं।


रिकॉर्ड और सम्मान

उन्होंने 12,000 से अधिक गीत विभिन्न भारतीय भाषाओं में रिकॉर्ड किए। वर्ष 2011 में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने उन्हें संगीत इतिहास में सबसे अधिक रिकॉर्डिंग करने वाली कलाकार के रूप में मान्यता दी। उन्हें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार और भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।


परिवार और पहचान

आशा भोसले महान गायिका लता मंगेशकर की छोटी बहन थीं और दोनों ने मिलकर भारतीय संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम योगदान दिया।


वैवाहिक जीवन

आशा भोसले ने अपने जीवन में दो शादियाँ की थीं। उनकी पहली शादी गणपत राव भोसले से हुई थी, जो उनके परिवार के खिलाफ जाकर कम उम्र में हुई थी। हालांकि यह रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं चला और बाद में दोनों अलग हो गए। इसके बाद उन्होंने मशहूर संगीतकार राहुल देव बर्मन से शादी की, जो हिंदी फिल्म संगीत के सबसे प्रभावशाली संगीतकारों में गिने जाते हैं।


अंतिम वर्षों तक सक्रियता

अपने जीवन के अंतिम वर्षों में भी वह संगीत से जुड़ी रहीं। उन्होंने समय-समय पर परफॉर्म किया और नई पीढ़ी के कलाकारों को प्रेरित करती रहीं। वर्ष 2023 में उन्होंने दुबई में ‘ASHA@90: Live in concert’ के जरिए अपने 90वें जन्मदिन का जश्न मनाया था।


देशभर में शोक की लहर

उनके निधन की खबर सामने आते ही देशभर में शोक की लहर दौड़ गई। प्रशंसकों, कलाकारों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भारतीय संगीत में उनके अतुलनीय योगदान को याद किया है।

Articles you may like: