नई दिल्ली: नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा और राज्यसभा के सभी दलों के फ्लोर लीडर्स को पत्र लिखकर महिला आरक्षण विधेयक के क्रियान्वयन के लिए समर्थन देने का आग्रह किया। उन्होंने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि यह अवसर किसी एक पार्टी या व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कहीं बड़ा है।
प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को लिखे पत्र में कहा कि व्यापक विचार-विमर्श के बाद यह निष्कर्ष निकला है कि अब ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को पूरे देश में वास्तविक भावना के साथ लागू करने का समय आ गया है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 2029 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण के प्रावधान के साथ ही कराए जाना आवश्यक है।
उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे महिलाओं और आने वाली पीढ़ियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी का परिचय देते हुए इस विधेयक के क्रियान्वयन का समर्थन करें। प्रधानमंत्री ने संसद में इस विषय पर चर्चा का स्वागत करते हुए कहा कि यह भारतीय राजनीति में महिलाओं के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित होगी।
अपने पत्र में उन्होंने सभी दलों से एक स्वर में इस संशोधन को पारित करने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक सांसदों को संसद में इस विषय पर अपने विचार रखने चाहिए। उन्होंने दोहराया कि यह क्षण किसी एक दल या व्यक्ति से ऊपर है और यह महिलाओं तथा भविष्य की पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी निभाने का समय है।
मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि सभी राजनीतिक दल लंबे समय से राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की इच्छा जताते रहे हैं, इसलिए अब उस आकांक्षा को साकार करने का यही उचित समय है। उन्होंने इसे देश की नारी शक्ति और 140 करोड़ भारतीयों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और विश्वास जताया कि सभी दल मिलकर संसद में इस ऐतिहासिक कार्य को पूरा करेंगे।
उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति तभी संभव है जब महिलाओं को आगे बढ़ने, निर्णय लेने और नेतृत्व करने के अवसर मिलें। भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की दिशा में महिलाओं की अधिक और सक्रिय भागीदारी बेहद आवश्यक है और यह विधेयक उस दिशा में एक अहम कदम साबित होगा।
प्रधानमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा 16 अप्रैल गुरुवार से शुरू होगी। अंत में उन्होंने सभी दलों से अपील की कि वे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लागू करने वाले इस संशोधन का समर्थन करें ताकि देश की महिलाओं के प्रति एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई जा सके, लोकतांत्रिक परंपराओं को और सशक्त बनाया जा सके और एक ऐतिहासिक परिवर्तन की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए जा सकें।