पटना: बिहार की राजनीति में तेजी से बदलते घटनाक्रम के बीच सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने की तैयारी शुरू हो गयी है। भाजपा विधायक दल की बैठक में उन्हें सर्वसम्मति से नेता चुना गया, जिससे उनके राज्य के अगले मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया। यह प्रक्रिया केंद्रीय पर्यवेक्षक और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में पूरी हुई।
सम्राट चौधरी के चयन के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि वे बिहार में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री होंगे। उनके नेतृत्व में नई सरकार के गठन की दिशा में अब आगे की कार्रवाई होगी। इस फैसले के बाद सहयोगी दल के नेता उपेन्द्र कुशवाहा ने उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए बधाई भी दी।
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि नीतीश कुमार के इस्तीफे से जुड़ी है। करीब 21 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहने के बाद उन्होंने पटना स्थित लोक भवन में राज्यपाल सैयद अता हसनैन को अपना इस्तीफा सौंपा, जिसे स्वीकार कर लिया गया। इससे पहले 10 अप्रैल को वे राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ भी ले चुके थे।
इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार ने एक विस्तृत संदेश जारी कर अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को गिनाया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया। उन्होंने बताया कि 24 नवंबर 2005 को राज्य में पहली बार एनडीए सरकार बनी थी, जिसके बाद कानून-व्यवस्था में सुधार हुआ और विकास कार्य लगातार आगे बढ़े। उनके अनुसार सरकार ने समाज के सभी वर्गों हिंदू, मुस्लिम, सवर्ण, पिछड़ा, अति पिछड़ा, दलित और महादलित के लिए काम किया। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और कृषि सहित हर क्षेत्र में प्रगति हुई, साथ ही महिलाओं और युवाओं के लिए भी कई पहलें की गईं। उन्होंने भरोसा जताया कि नई सरकार को उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा तथा आगे भी बिहार विकास की राह पर आगे बढ़ता रहेगा।
वहीं, इस राजनीतिक बदलाव पर विपक्ष की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई। तेजस्वी यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए जो नेता महात्मा गांधी का नाम लेते थे, अब वही भाजपा को सत्ता में आने का अवसर दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम उस विचारधारा को मजबूत करने जैसा है जिसे वे महात्मा गांधी की हत्या से जोड़ते हैं और यह उन नेताओं को आगे बढ़ाने जैसा है जिन्होंने कभी कर्पूरी ठाकुर का विरोध किया था।
तेजस्वी यादव ने कहा कि जो भी नई सरकार बनेगी और जो भी मुख्यमंत्री बनेगा, वह जनता की पसंद का प्रतिनिधि नहीं होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अब बिहार की सत्ता पर बाहरी प्रभाव बढ़ेगा और राज्य का संचालन गुजरात के प्रभाव में होगा।