नई दिल्ली: भारतीय अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल अगले सप्ताह अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन जाएगा, जहां वह अमेरिकी अधिकारियों के साथ व्यापार से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा करेगा। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब दोनों देश आपसी व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
बैठक क्यों है महत्वपूर्ण?
यह बैठक न सिर्फ व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए अहम है, बल्कि अमेरिका की जांच और नई टैरिफ नीति के बीच भारत की रणनीति तय करने के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत और अमेरिका के बीच होने वाली यह द्विपक्षीय वार्ता इसलिए भी काफी अहम मानी जा रही है क्योंकि दोनों देशों ने अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक ढांचा तैयार कर लिया है। एक आधिकारिक सूत्र के अनुसार प्रतिनिधिमंडल अगले सप्ताह अमेरिका पहुंचेगा और इस समझौते को आगे बढ़ाने पर चर्चा करेगा।
समझौता पहले क्यों नहीं हो पाया?
यह समझौता पहले मार्च में साइन होना था, लेकिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद टैरिफ से जुड़ी परिस्थितियां बदल गईं। इस वजह से समझौते की प्रक्रिया में देरी हुई। पहले यह भी कहा गया था कि जब तक अमेरिका की नई वैश्विक टैरिफ व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं होती, तब तक समझौते पर हस्ताक्षर नहीं होंगे।
टैरिफ में क्या बदलाव हुआ?
फरवरी में दोनों देशों ने समझौते के पहले चरण का ढांचा तय किया था, जिसके तहत अमेरिका भारत पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत हुआ था। लेकिन बाद में अदालत के फैसले ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रेसिप्रोकल टैरिफ नीति को प्रभावित किया। इसके बाद अमेरिका ने 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए सभी देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लागू कर दिया।
बैठक टलने की वजह
इन बदलावों के कारण पिछले महीने भारत और अमेरिका के मुख्य वार्ताकारों की बैठक टाल दी गई थी। दोनों देश फरवरी में इस समझौते के कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देने वाले थे, लेकिन परिस्थितियों के चलते यह संभव नहीं हो पाया।
भारत की स्थिति पर क्या असर पड़ा?
जब भारत ने इस समझौते का ढांचा तैयार किया था, तब उसे अन्य देशों के मुकाबले कुछ बढ़त मिली हुई थी। लेकिन अब अमेरिका ने सभी व्यापारिक साझेदारों पर समान 10 प्रतिशत टैरिफ लागू कर दिया है, जिससे प्रतिस्पर्धा का स्तर बराबर हो गया है।
सेक्शन 301 की जांच क्यों अहम है?
अगले सप्ताह होने वाली यह बैठक इसलिए भी खास है क्योंकि अमेरिका सेक्शन 301 के तहत दो जांच कर रहा है। 12 मार्च को यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव(USTR) ने एक जांच शुरू की, जिसमें भारत और चीन समेत 60 अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। इन जांचों का मकसद यह समझना है कि क्या इन देशों की नीतियां, खासकर जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर रोक लगाने में कमी, अनुचित या भेदभावपूर्ण हैं और क्या वे अमेरिकी व्यापार को प्रभावित करती हैं।
दूसरी जांच में क्या देखा जा रहा है?
इससे एक दिन पहले 11 मार्च को USTR ने एक और जांच शुरू की थी, जिसमें भारत और चीन सहित 16 अर्थव्यवस्थाओं की औद्योगिक नीतियों और काम करने के तरीकों की समीक्षा की जा रही है।