कोलकाताः बंगाली नववर्ष ‘पोइला बैशाख’ (Poila Boishakh) के मौके पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने राज्यवासियों को शुभकामनाएं देते हुए राजनीतिक रूप से तीखा संदेश दिया। उन्होंने अपने संदेश में आरोप लगाया कि “दिल्ली के जमींदार” लोगों के मतदान अधिकारों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं और इसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देने की जरूरत है।
नववर्ष पर शुभकामनाएं और सांस्कृतिक संदेश
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि बंगाल कला, संस्कृति और विविधता की भूमि है, जहां सभी धर्मों और समुदायों के बीच सद्भाव की मजबूत परंपरा रही है। उन्होंने लोगों को नए साल की शुभकामनाएं देते हुए शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि ‘पोइला बैशाख’ केवल नववर्ष की शुरुआत नहीं, बल्कि नई उम्मीदों और सकारात्मकता का प्रतीक है, जो लोगों को एकजुट रहने की प्रेरणा देता है।
एकता और सामाजिक सौहार्द पर जोर
ममता बनर्जी ने लोगों से अपील की कि इस नए वर्ष पर सभी मतभेदों को पीछे छोड़कर एकजुटता का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि समाज में किसी भी तरह की विभाजनकारी सोच या ताकत को जगह नहीं मिलनी चाहिए, जो लोगों के बीच दूरी पैदा करे।
उन्होंने जोर देकर कहा कि बंगाल की परंपरा हमेशा से भाईचारे और आपसी सम्मान की रही है, जिसे बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। ‘पोइला बैशाख’ बंगाली नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है, जिसे देश और दुनिया भर में बंगाली समुदाय उत्साहपूर्वक मनाता है। इस दिन लोग नए कैलेंडर वर्ष 1432 का स्वागत करते हैं और घरों में पूजा, सजावट और पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ उत्सव मनाया जाता है।
चुनावी संदर्भ और अपील
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होने हैं, जबकि मतगणना 4 मई को निर्धारित है। ऐसे में मुख्यमंत्री का यह संदेश चुनावी माहौल को और अधिक सक्रिय करता दिख रहा है।
अपने संदेश के अंत में ममता बनर्जी ने मतदाताओं से अपील की कि वे तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के चुनाव चिन्ह ‘जोड़ा फुल’ के पक्ष में मतदान करें और पार्टी के सभी उम्मीदवारों को समर्थन दें।
राजनीतिक हमला और तीखा बयान
अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने केंद्र पर अप्रत्यक्ष निशाना साधते हुए कहा कि कुछ ताकतें राज्य के लोगों के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि “दिल्ली के जमींदार” मतदान के अधिकारों को प्रभावित कर रहे हैं और इसके खिलाफ जनता को “लोकतांत्रिक जवाब” देना चाहिए। उनका यह बयान आगामी विधानसभा चुनावों के संदर्भ में काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है।