पटना: बिहार की राजनीति मंगलवार को एक बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ी नजर आ रही है। राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार (Nitish Kumar) आज अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं, जिससे पहली बार राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार का गठन संभव हो जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सुबह 11 बजे होने वाली कैबिनेट की आखिरी बैठक के बाद राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं। यह प्रक्रिया संवैधानिक औपचारिकता का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें मुख्यमंत्री अपने सहयोगियों को कैबिनेट भंग करने की जानकारी देते हैं।
इसके बाद राज्य की सबसे बड़ी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) अपने विधायक दल की बैठक करेगी, जिसमें नए नेता का चयन किया जाएगा। यह बैठक दोपहर 3 बजे पार्टी कार्यालय में प्रस्तावित है।
इस महत्वपूर्ण बैठक के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) पटना पहुंच सकते हैं। वहीं, शाम 4 बजे एनडीए के सभी विधायक राज्य विधानसभा के सेंट्रल हॉल में जुटेंगे और सरकार गठन को लेकर औपचारिक समर्थन पत्र राज्यपाल को सौंपा जाएगा।
वर्तमान विधानसभा में 243 सीटों में से एनडीए के पास 202 विधायकों का समर्थन है। इसमें भाजपा के 89, जद(यू) के 85, लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के 19, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के 5 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के 5 विधायक शामिल हैं।
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। हालांकि, पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय नेतृत्व की ओर से किसी ‘सरप्राइज’ नाम की घोषणा भी हो सकती है, जैसा हाल ही में अन्य राज्यों में देखा गया है।
उधर, जद(यू) के नेता इस राजनीतिक बदलाव के बीच यह उम्मीद जता रहे हैं कि भले ही नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ दें, लेकिन सरकार के संचालन में उनकी भूमिका बनी रह सकती है। पार्टी के नेताओं का मानना है कि नई सरकार उनके मार्गदर्शन में काम करेगी।
साथ ही, जद(यू) के भीतर यह भी चर्चा है कि नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार, जिन्होंने हाल ही में पार्टी जॉइन की है, उन्हें नई सरकार में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है।
बिहार की राजनीति में यह बदलाव न केवल सत्ता समीकरण को बदलेगा, बल्कि आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक दिशा भी तय कर सकता है।