सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ता (DA) की पहली किस्त देने के लिए राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से दिसंबर तक के समय की मांग करते हुए आवेदन किया है। कल, बुधवार (15 अप्रैल 2026) को उस मामले की सुनवाई हो सकती है।
न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्र की खंडपीठ ने आदेश दिया था कि बकाया DA की पहली किस्त के तौर पर 25 प्रतिशत रुपया अविलंब देना होगा। राज्य सरकार का दावा है कि वर्तमान में कार्यरत सरकारी कर्मचारी और अवकाशप्राप्त कर्मचारियों को बकाया DA देना होगा। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सभी के बैंक अकाउंट में वह रुपया नहीं पहुंचा है।
अवकाशप्राप्त न्यायाधीश इंदू मल्होत्रा के नेतृत्व में गठित कमेटी की सिफारिश थी कि साल 2016 से 2019 के बीच का बकाया DA जल्द से जल्द देना होगा। वर्ष 2008 से 2015 तक के बकाया को देने के लिए पोर्टल बनाना होगा जहां सभी जानकारियों को अपलोड करने की सलाह राज्य सरकार को दी गयी थी। साथ ही यह भी कहा गया था कि राज्य सरकार को उस पोर्टल के बारे में विस्तार से शिकायतकर्ता कॉनफेडरेशन ऑफ स्टेट गवर्नमेंट एम्प्लाइज को जानकारी देनी होगी।
उक्त संगठन के वकील फिरदौस शमिम का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के किसी भी आदेश को राज्य सरकार ने नहीं माना है। यहां तक कि पोर्टल बनाने का आदेश भी अभी तक लागू नहीं हुआ है। अगली सुनवाई में इस बारे में विस्तृत जानकारियां हम अदालत में पेश करेंगे।