नई दिल्लीः नई दिल्ली में संसद का विशेष सत्र आज से शुरू हो रहा है, जिसमें कई अहम विधेयक पेश किए जाने हैं। इनमें सबसे प्रमुख है महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनावों से लागू करने से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक। इसके साथ ही परिसीमन (Delimitation) और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े कानून संशोधन विधेयक भी एजेंडे में शामिल हैं।
सरकार ने बजट सत्र के इस विशेष बैठक को 16, 17 और 18 अप्रैल के लिए बुलाया है, ताकि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन को आगे बढ़ाया जा सके।
महिला आरक्षण विधेयक का एजेंडा
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 पेश करेंगे। वहीं गृह मंत्री अमित शाह केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े संशोधन विधेयक को सदन में लाएंगे।
सरकार का प्रस्ताव है कि महिला आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनावों से लागू किया जाए, जो 2011 की जनगणना के आधार पर होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विपक्ष से अपील की है कि इस संशोधन को सर्वसम्मति से पास किया जाए, ताकि महिलाओं को जल्द प्रतिनिधित्व मिल सके।
परिसीमन बिल पर सियासी टकराव
वहीं दूसरी ओर परिसीमन विधेयक को लेकर विपक्ष ने कड़ा रुख अपनाया है। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए भी परिसीमन प्रस्ताव का विरोध किया है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में हुई विपक्षी बैठक में तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, समाजवादी पार्टी, राजद, आप, एनसीपी (शरद पवार गुट), शिवसेना (उद्धव गुट), जेएमएम और वाम दलों सहित कई दल शामिल हुए। विपक्ष का कहना है कि वे महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन परिसीमन के मौजूदा स्वरूप को स्वीकार नहीं कर सकते।
विपक्ष के आरोप और चिंताएं
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि परिसीमन प्रस्ताव राज्यों के बीच राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर सकता है और इसे लेकर गंभीर सवाल हैं। विपक्ष का कहना है कि दक्षिण और पूर्वोत्तर सहित कई राज्यों की सीटों पर असर पड़ सकता है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी परिसीमन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे राजनीतिक लाभ के लिए निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन का प्रयास बताया। वहीं कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने इसे संघीय ढांचे के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज किया।
सरकार का पक्ष
वहीं बीजेपी नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी राज्य का प्रतिनिधित्व कम करना नहीं है, बल्कि सभी को न्यायसंगत प्रतिनिधित्व देना है।
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण लागू करना सरकार की प्रतिबद्धता है और यह लंबे समय से लंबित मांग को पूरा करने की दिशा में कदम है।
संसद का यह विशेष सत्र राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां एक ओर महिला आरक्षण विधेयक को आगे बढ़ाने की कोशिश है, वहीं परिसीमन बिल को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखा मतभेद सामने आ रहा है।