कोलकाता : कोलकाता में सामाजिक व साहित्यिक संस्था शब्दकार के तत्वावधान में भारतीय संविधान के निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भारतीय भाषा परिषद के सामने स्थित सम्मेलन हॉल में आयोजित हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता शम्भुनाथ राय ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. अंबेडकर की सबसे बड़ी देन यह है कि उन्होंने समाज के वंचित और उपेक्षित वर्गों को आत्मसम्मान और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी। उनका प्रसिद्ध नारा “शिक्षित बनो, संगठित हो, संघर्ष करो” आज भी सामाजिक परिवर्तन का मूल मंत्र है।
मुख्य अतिथि विश्वंभर नेवर ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने देश को सामाजिक समरसता का संदेश दिया और यह भी सिखाया कि राष्ट्र सर्वोपरि है। उन्होंने भारतीय संस्कृति और मूल्यों से जुड़े एक महान व्यक्तित्व के रूप में अंबेडकर को याद किया।
विशिष्ट अतिथि मिली दास ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने अपना पूरा जीवन वंचित वर्ग के उत्थान के लिए समर्पित किया। प्रधान अतिथि सत्य प्रकाश दुबे ने कहा कि अंबेडकर के विचार सच्चे राष्ट्रवाद से जुड़े हैं, जिसमें जाति, वर्ग, वर्ण और धर्म के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होता।
प्रधान वक्ता शिव शंकर सिंह सुमित ने कहा कि आज जब भारत सामाजिक और आर्थिक विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है, तब डॉ. अंबेडकर के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं।
कार्यक्रम के दौरान कई कवियों ने डॉ. अंबेडकर पर आधारित कविताएं प्रस्तुत कीं। इनमें राम पुकार सिंह ‘पुकार’ गाजीपुरी, विजय शर्मा ‘विद्रोही’, नीतु शर्मा, मुजतर इफ्तिखारी, जतिब हयाल, कमला पति पाण्डेय ‘निडर’, फौजिया अख्तर ‘रीदा’, एजाज वारसी, रामनारायण झा ‘देहाती’, सुरेन्द्र सिंह, रणजीत भारती, मोहम्मद अय्यूब वारसी ‘कोलकतवी’, धर्म दुबे, रवि पारख, डॉ. अहमद मिराज, अशरफ याकुबी, डॉ. शाहिद फरोगी, पूर्णिमा जायसवाल और विद्या प्रसाद साथी ने अपनी रचनाएं सुनाकर खूब सराहना प्राप्त की।
कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन प्रदीप कुमार धानुक ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन ओम प्रकाश चौबे ने प्रस्तुत किया।