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राजस्‍थान के जैसलमेर में 46 डि‍ग्री पहुंचने वाला है तापमान, IMD ने जारी किया हीटवेव का अलर्ट

उदयपुर में बुधवार को अचानक गर्म हवाएं चलने से हीटवेव का अहसास द‍िलाने लगी। लोग घरों से बाहर एहत‍ियात बरतते हुए न‍िकल रहे हैं।

By लखन भारती

Apr 15, 2026 17:43 IST

जयपुरः राजस्थान के जैसलमेर में भीषण गर्मी पड़ने लगी है। तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, और इसका असर आम जनजीवन पर साफ दिखाई दे रहा है। सोमवार को अधिकतम तापमान 41.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इस सीजन में अब तक का सबसे ज्यादा है। दोपहर के समय तेज धूप और गर्म हवाओं ने हालात और भी मुश्किल कर दिए। सड़कों पर सन्नाटा नजर आया और लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले। मंगलवार को तापमान बढ़ा और बुधवार को भी तापमान में बढ़ोत्तरी हुई। यानी जैसलमेर में 46 डि‍ग्री पहुंचने वाला है तापमान।

आने वाले समय में और बढ़ेगा तापमान

शहर के विभिन्न इलाकों में लगाए गए प्याऊ और मटकी का ठंडा पानी राहगीरों के लिए राहत का जरिया बन रहा है। लोग रुककर पानी पीते नजर आ रहे हैं, जिससे कुछ हद तक गर्मी से राहत मिल रही है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को सावधानी बरतने, दोपहर में धूप से बचने और ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ लेने की सलाह दी गई है।

उदयपुर के तापमान में अचानक उछाल

उदयपुर में पिछले तीन दिनों में तापमान में अचानक उछाल देखने को मिला हैं। सोमवार को तापमान 39.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो कि इस महीने का सबसे गर्म दिन रहा। यहीं नहीं, मौसम विभाग ने इस सप्ताह आसमान साफ रहने और तापमान 40 डिग्री तक पहुंचने की संभावना जताई हैं। वहीं मंगलवार दोपहर को अचानक गर्म हवाएं चलने लगी और हीटवेव का अहसास दिलाने लगी।

इस बार सामान्य रहेगी बारिश

इस साल मानसून को लेकर तस्वीर थोड़ी चिंताजनक नजर आ रही है। मौसम विभाग के पहले पूर्वानुमान में साफ कहा गया है कि देश में इस बार सामान्य से कम बारिश हो सकती है। जून से सितंबर के बीच होने वाली बारिश औसत का करीब 92 प्रतिशत रहने का अनुमान है, यानी लगभग 8 प्रतिशत की कमी होने का अनुमान है। मौसम विभाग के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि इसकी सबसे बड़ी वजह अल नीनो को माना जा रहा है। यह प्रशांत महासागर के पानी के गर्म होने की स्थिति होती है जो भारत में मानसून को कमजोर कर देती है। इसका असर जून के आसपास दिखना शुरू हो सकता है जिससे मानसून की शुरुआत और उसकी रफ्तार दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

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