नई दिल्लीः नई दिल्ली में संसद के विशेष सत्र से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। गुरुवार को विपक्षी दलों के फ्लोर लीडर राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यालय में बैठक करेंगे, जहां संसद में सरकार के सामने संयुक्त रणनीति तैयार की जाएगी।
यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब संसद के विशेष सत्र में तीन अहम विधेयक पेश किए जाने की संभावना है। इनमें सबसे प्रमुख है महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक, जिसे 2029 के लोकसभा चुनावों से लागू करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही परिसीमन (Delimitation) और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े कानून संशोधन विधेयक भी सूची में शामिल हैं।
महिला आरक्षण और परिसीमन बिल एजेंडे में
सरकार की योजना के अनुसार, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल संविधान (131वां संशोधन) विधेयक और परिसीमन विधेयक 2026 पेश करेंगे, जबकि गृह मंत्री अमित शाह केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े संशोधन विधेयक को सदन मेंलाएंगे।
सरकार ने तीन दिवसीय विशेष सत्र (16, 17 और 18 अप्रैल) बुलाया है, जिसका उद्देश्य नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन को आगे बढ़ाना बताया गया है।
विपक्ष की मुख्य आपत्तियां
विपक्षी दलों का कहना है कि वे महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन परिसीमन विधेयक को लेकर गंभीर आपत्तियाँ हैं। विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 तक करने की योजना से राज्यों के प्रतिनिधित्व संतुलन पर असर पड़ सकता है। कई विपक्षी दलों ने कहा है कि परिसीमन प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता और संवैधानिक सुरक्षा जरूरी है।
पीएम मोदी की विपक्ष से अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष से अपील की है कि महिला आरक्षण विधेयक को सर्वसम्मति से पास किया जाए। उन्होंने कहा कि यह देश की महिलाओं की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
संसद का यह विशेष सत्र सत्ता और विपक्ष के बीच अहम टकराव का मंच बनता दिख रहा है। जहां एक ओर महिला आरक्षण को लेकर सहमति की कोशिश है, वहीं परिसीमन बिल ने राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है।