नई दिल्ली: महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का आरोप है कि सरकार इन बिलों को जल्दबाजी में ला रही है और इसके पीछे चुनावी प्रक्रिया में बदलाव कर लोकतंत्र को प्रभावित करने की मंशा छिपी हुई है।
“जल्दबाजी क्यों?”सरकार के इरादों पर उठे सवाल
तृणमूल कांग्रेस की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा में बहस के दौरान सवाल उठाया कि जब महिला आरक्षण का मुद्दा लंबे समय से लंबित था तो अब अचानक इसे चुनावों के बीच क्यों लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान हो चुका है, जबकि तमिलनाडु में 23 अप्रैल और पश्चिम बंगाल में 23 व 29 अप्रैल को मतदान होना है, तथा मतगणना 4 मई को निर्धारित है।
महिला आरक्षण के बहाने चुनावी ढांचे में बदलाव का आरोप
दस्तीदार ने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण का मुद्दा असल में चुनावी प्रक्रिया को बदलने का एक जरिया बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह कदम लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
महिलाओं के मुद्दों पर सरकार की चुप्पी पर सवाल
उन्होंने केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि हाथरस, उन्नाव और कठुआ जैसे मामलों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर सरकार उतनी सक्रिय नहीं दिखी, जितनी अब आरक्षण के मुद्दे पर नजर आ रही है। उन्होंने यह भी पूछा कि अब अचानक महिलाओं के आरक्षण को लेकर इतनी सक्रियता क्यों दिखाई जा रही है।
टीएमसी का रुख आरक्षण के पक्ष में, सीमा बढ़ाने की मांग
दस्तीदार ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है। उन्होंने बताया कि टीएमसी में पहले से ही 33 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व है और पार्टी इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक करने की पक्षधर है।
परिसीमन आयोग पर भी जताई आशंका
टीएमसी सांसद ने प्रस्तावित परिसीमन आयोग को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जैसे भारत निर्वाचन आयोग पर पक्षपात के आरोप लगते रहे हैं, उसी तरह यह नया आयोग भी “तानाशाही रवैया” अपना सकता है।
लोकसभा सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव
प्रस्तावित संविधान संशोधन के मुताबिक, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक की जा सकती है ताकि 2029 के आम चुनाव से पहले महिला आरक्षण को लागू किया जा सके।
तीन अहम विधेयकों पर शुक्रवार को मतदान संभव
लोकसभा में जिन तीन विधेयकों पर चर्चा चल रही है, उनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, डिलिमिटेशन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल हैं। इन पर शुक्रवार को मतदान होने की संभावना है।