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फीडे महिला कैंडिडेट्स 2026 में वैशाली की शानदार जीत बनीं पहली भारतीय महिला विजेता

आर. वैशाली ने रचा इतिहास बनीं पहली भारतीय महिला विजेता निचले स्थान से शिखर तक वैशाली की अद्भुत वापसी से खिताब पर कब्जा

By शिखा सिंह

Apr 16, 2026 17:22 IST
साइप्रस : भारत की स्टार शतरंज खिलाड़ी आर. वैशाली ने एक बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने फीडे महिला कैंडिडेट्स 2026 के अंतिम दौर में कैटरीना लाग्नो को हराकर खिताब अपने नाम किया। इसके साथ ही वह इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता को जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं।

अब वैशाली महिला विश्व चैंपियनशिप के खिताब के लिए जु वेनजुन का सामना करेंगी। इस जीत के साथ उन्होंने एक नया विश्व कीर्तिमान भी बनाया है।

चैंपियन बनने पर वैशाली को 28 हजार यूरो (लगभग 30 लाख 79 हजार रुपये) का नकद पुरस्कार मिला। यह उनके जीवन का सबसे बड़ा पुरस्कारों में से एक है। हालांकि उनकी कुल कमाई इससे भी अधिक होगी क्योंकि इस प्रतियोगिता में हर दौर के प्रदर्शन के आधार पर अतिरिक्त राशि दी जाती है। हर आधे अंक के लिए 2200 यूरो मिलते हैं। वैशाली ने 14 दौर में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया जिससे उनकी कुल पुरस्कार राशि 28 हजार यूरो से ज्यादा हो जाएगी।

वैशाली अब विश्व चैंपियनशिप में पहुंचने वाली दूसरी भारतीय महिला बन गई हैं। इससे पहले 2011 में कोनेरू हम्पी ने यह उपलब्धि हासिल की थी। पिछले तीन वर्षों में यह वैशाली की तीसरी बड़ी सफलता है। वह दो बार फीडे ग्रैंड स्विस प्रतियोगिता जीत चुकी हैं और 2024 में महिला ओलंपियाड जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा भी रही हैं।

इस जीत का सफर आसान नहीं था। प्रतियोगिता के पहले पांच दौर के बाद वैशाली अंक तालिका में सबसे नीचे थीं। उनके साथ दिव्या देशमुख और तान झोंगयी भी निचले स्थान पर थीं लेकिन इसके बाद वैशाली ने शानदार वापसी की लगातार बेहतर प्रदर्शन किया और अंत में खिताब जीत लिया। दूसरी ओर दिव्या और तान प्रतियोगिता के अंत तक निचले स्थानों पर ही रहीं।

यह पहली बार नहीं है जब वैशाली ने ऐसा कमाल किया हो। दो साल पहले टोरंटो में भी इसी प्रकार की प्रतियोगिता के दौरान वह लगातार चार मुकाबले हारकर नीचे पहुंच गई थीं लेकिन आखिरी पांच मुकाबले जीतकर खिताब के बेहद करीब पहुंच गई थीं।

खास बात यह है कि इस प्रतियोगिता से पहले वैशाली को बड़ा दावेदार नहीं माना जा रहा था। पांच बार के विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने उन्हें ‘छिपा हुआ मजबूत खिलाड़ी’ बताया था। कई लोग उनके भाई आर. प्रज्ञानंद को प्रमुख दावेदार मान रहे थे लेकिन वह सातवें स्थान पर रहे।


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