दार्जिलिंगः पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग पहाड़ी क्षेत्र में गोरखा समुदाय से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनावी सभा के दौरान दावा किया कि गोरखाओं की समस्याओं का समाधान केवल भाजपा ही कर सकती है।
कार्शियांग के सुकना में आयोजित रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद गोरखा समुदाय की वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। शाह ने यह भी भरोसा दिलाया कि जो मांगें लंबे समय से गोरखा समुदाय की ओर से उठती रही हैं, उन्हें ध्यान में रखते हुए ठोस कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार बनने के बाद 6 मई के आसपास ऐसे फैसले लिए जाएंगे, जिससे गोरखा समुदाय के लोगों के चेहरे पर खुशी लौट आएगी।
अमित शाह ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा गोरखा मुद्दे पर बातचीत के लिए कई बार बैठकें बुलाए जाने के बावजूद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से कोई प्रतिनिधि नहीं भेजा गया। इसी कारण केंद्र सरकार को मध्यस्थ नियुक्त करना पड़ा।
गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव 2019 के बाद केंद्र ने पहाड़ी क्षेत्रों के मुद्दों के समाधान के लिए एक मध्यस्थ नियुक्त किया था, जिसे लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव भी बढ़ा था। शाह ने अपने संबोधन में यह भी दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान तृणमूल कांग्रेस पर गोरखा समुदाय के कई लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने का आरोप है। उन्होंने कहा कि भाजपा सत्ता में आने पर इन सभी नामों को फिर से सूची में शामिल किया जाएगा।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी वादा किया कि जिन गोरखा लोगों के खिलाफ राज्य सरकार ने मामले दर्ज किए हैं, उन्हें भाजपा सरकार बनने पर वापस लिया जाएगा। अमित शाह का यह बयान गोरखा क्षेत्र की राजनीति में एक बार फिर चुनावी गर्मी बढ़ाता दिखाई दे रहा है, जहां भाजपा ने पहाड़ी समुदाय के लिए बड़े वादे किए हैं और तृणमूल सरकार पर सीधे सवाल उठाए हैं।