पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण का चुनाव होने में मात्र 2 दिनों का समय रह गया है। हिंसामुक्त और निष्पक्ष चुनाव को लेकर आयोग हर तरह से तैयारियां कर रहा है। इसी क्रम में हाल ही में सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेस (CAPF) की उच्च स्तरीय बैठक कोलकाता में हुई जिसमें सुरक्षा व्यवस्था से लेकर केंद्रीय बल के जवानों की नियुक्ति तक को लेकर चर्चा की गयी।
बताया जाता है कि इस बैठक में पूरे बंगाल के सभी यूनिट चीफ मौजूद थे। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि संभवतः ऐसा पहली बार हुआ है जब चुनाव को लेकर इतनी भारी तादाद में सुरक्षाकर्मियों ने बैठक में हिस्सा लिया।
TOI की मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार चुनाव आयोग 23 और 29 अप्रैल को चुनाव के दोनों चरणों में कुल 2407 कंपनी केंद्रीय बल को तैनात करेगी। इसमें पहले पहले चरण का चुनाव 16 जिलों में होगा जिसमें 152 विधानसभा केंद्र शामिल होंगे। बताया जाता है कि इस साल बंगाल में चुनाव के दौरान अब तक की सबसे ज्यादा केंद्रीय बलों की तैनाती की जा रही है।
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में 7 चरणों के लिए 900 कंपनी CAPF की तैनाती की गयी थी। वहीं 2021 के विधानसभा चुनाव के 8 चरणों के लिए 725 कंपनी CAPF की तैनाती की गयी थी। बात अगर साल 2024 के जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव की करें तो उसमें भी 900 कंपनी CAPF की तैनाती हुई थी। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी करीब 635 कंपनी CAPF को जम्मू-कश्मीर में तैनात किया गया था।
इस बैठक के बारे में मीडिया से बात करते हुए एक वरिष्ठ CAPF अधिकारी ने बताया कि यह CAPF DG की संयुक्त बैठक थी जो अब तक कभी भी किसी भी विधानसभा चुनाव में नहीं हुई थी।
मीडिया से बात करते हुए CISF के DG प्रवीर राजन ने बताया कि हमारा लक्ष्य बंगाल में सामान्य सुरक्षा से कहीं बढ़कर है। यह बैलेट पत्रों को सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। मैदान में तैनात केंद्रीय बलों के लिए मेरा स्पष्ट संदेश हैं - आप लोकतंत्र के संरक्षक हैं। हमें अलग-अलग व्यक्तियों की तरह नहीं बल्कि 'एक चुनाव बल' (One Election Force) के तौर पर काम करना होगा।