पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में होने वाली हिंसक घटनाओं को रोकने के लिए चुनाव आयोग ने शुरुआत से ही अपनी कमर कस ली है। कहीं सिर्फ केंद्रीय वाहिनी तो कहीं केंद्रीय वाहिनी के साथ पुलिस बल को भी सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है ताकि शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव की प्रक्रिया को संपन्न करवाया जा सकें। लेकिन...
राज्य में कुछ इलाके ऐसे भी हैं जहां केंद्रीय बल के जवान अथवा स्थानीय पुलिस भी असहाय बन जाती है। इन इलाकों में समस्या का कारण है वन्य जीव। यहां हिंसा का खतरा इंसानों से नहीं बल्कि जंगली जानवरों से होता है।
उत्तर बंगाल में खासतौर पर चाय बगान से लेकर राष्ट्रीय उद्यान के आसपास के इलाकों में अक्सर तेंदुओं के हमले की शिकायतें आती रहती हैं। इसके अलावा घनी आबादी वाले इलाकों में जंगली हाथियों के हमलों का डर भी रहता है। इसलिए इन समस्याओं से निपटने के लिए चुनाव आयोग ने विशेष तैयारियां की हैं।
Read Also | चुनावी रैली के बाद PM मोदी का छोटा सा 'झालमुड़ी ब्रेक', कितने की खरीदी झालमुड़ी? देखें Video
प्राप्त जानकारी के अनुसार जंगल और चाय बगान से सटे इलाकों की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए चुनाव आयोग ने वन विभाग की मदद लेने का फैसला लिया है। बताया जाता है कि मतदान के दौरान वोटिंग सेंटर के चारों तरफ और वोटिंग सेंटर तक आने-जाने के रास्ते में प्रशिक्षित हाथियों को पहरे पर लगाया जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार विशेष रूप से जंगली हाथियों को मतदान केंद्र तक आने या वहां तक पहुंचने के रास्ते में आने से रोकने के लिए ही प्रशिक्षित हाथियों की मदद लेने का फैसला चुनाव आयोग ने लिया है। इसके साथ ही वन विभाग के कर्मचारियों को भी तैनात किया जाएगा। यहां तक कि मतदान केंद्रों तक वोट कर्मियों को पहुंचने और उन्हें वापस लाने के लिए प्रशिक्षित हाथियों का सहारा लिया जाएगा।
मतदान केंद्रों पर जंगली हाथियों के हमले का खतरा/फाइल फोटो ANI मीडिया से बात करते हुए जलदापाड़ा के डीएफओ प्रवीण काशवान ने बताया कि जलदापाड़ा वन्य अंचल और आसपास को मिलाकर कुल 124 मतदान केंद्र हैं। मतदान प्रक्रिया के दौरान कंट्रोल रूम तो सक्रिय रहेगा। इसके साथ ही आपातकालिन परिस्थिति से निपटने के लिए मदारीहाट में भी एक क्विक रेस्पॉन्स टीम 24 घंटे तैयार रहेगी।
अलीपुरदुआर की जिला निर्वाचन अधिकारी व जिलाधिकारी मयूरी बसु ने कहा कि वन विभाग से बात कर प्रशिक्षित हाथियों को तैयार रखने के लिए कहा गया है। हमारे जिले में हाथियों के हमले ज्यादा होते हैं। इसलिए हम मतदानकर्मियों की सुरक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
बता दें, मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के मुताबिक जलपाईगुड़ी जिले के गोरुमारा राष्ट्रीय उद्यान में प्रशिक्षित हाथियों की संख्या 26, अलीपुरदुआर जिले के जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान में प्रशिक्षित हाथियों की संख्या 85 और बक्सा टाइगर रिजर्व में प्रशिक्षित हाथियों की संख्या 4 है।