पिछले 12 सालों में ऐसा पहली बार हुआ है जब केंद्र सरकार का कोई प्रस्ताव संसद से पारित नहीं हुआ। विरोधियों की सम्मिलित शक्ति के आगे केंद्र सरकार को हार का सामना पड़ा है। एक ओर जहां राष्ट्रीय राजनीति में महिला आरक्षण बिल के पास नहीं होने की चर्चाएं जोरों पर है।
ऐसे समय में ही चुनावी राजनीति के मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कूद चुके हैं। संविधान संशोधनी बिल के लोकसभा में पास नहीं होने के बाद पहली बार बंगाल में चुनाव प्रचार के लिए आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तृणमूल को आड़े हाथों लिया।
उन्होंने तृणमूल पर कांग्रेस के साथ मिलकर षड्यंत्र करने का आरोप लगाते हुए कहा कि बंगाल की माताओं-बहनों के साथ विश्वासघात किया गया है। केंद्र की मोदी सरकार साल 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण को लागू कर सीटों का पुनर्विन्यास करना चाहती थी। इसलिए ही 131वां संविधान संशोधनी बिल लाया गया था लेकिन केंद्र सरकार के इस बिल को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका। बिल पास नहीं हो पाया।
इसके बाद से ही भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक लगातार विरोधियों पर निशाना साध रहे हैं। रविवार को बांकुड़ा के बड़जोड़ा में चुनावी सभा को संबोधित करने पहुंचे प्रधानमंत्री ने एक बार फिर से यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि विकसित भारत में महिलाएं आगे आएं।
राजनीति में भी महिलाओं की भागीदारी हो। लेकिन आपलोगों ने देखा कि संसद में क्या हुआ। तृणमूल ने बंगाल की बहनों के साथ फिर से विश्वासघात किया। माता-बहनें 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग कर रही थी। मोदी ने वह कोशिश भी की लेकिन तृणमूल ऐसा नहीं चाहती। वह नहीं चाहती कि बंगाल की महिलाएं विधायक-सांसद बने। इसलिए कांग्रेस से हाथ मिलकर कानून नहीं बनने दिया।
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बांकुड़ा की सभा से घुसपैठ को लेकर एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी आवाज उठायी। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि तृणमूल घुसपैठियों को सुविधा पहुंचाने के लिए सभी नियम-कानूनों को खत्म कर रही है। धर्म के आधार पर आरक्षण करना चाहती है। संविधान को नष्ट कर देना चाहती है। घुसपैठियों की बात मानती है लेकिन कुड़मियों की बात नहीं मानती है। इस बात तृणमूल को सजा देनी होगी।
शनिवार की रात को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में भी प्रधानमंत्री मोदी ने लगातार कांग्रेस पर हमला किया। कांग्रेस के अलावा प्रधानमंत्री के निशाने पर तृणमूल, तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके और उत्तर प्रदेश की अखिलेश यादव की पार्टी समाजवादी पार्टी भी थी। हालांकि तृणमूल ने संसद में इस बिल पर पलटवार करते हुए कहा कि 33 प्रतिशत क्यों 50 प्रतिशत आरक्षण किया जाए। तृणमूल की ओर से लोकसभा में काकोली घोषदस्तीदार और कल्याण बनर्जी ने बात रखी।