कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। राज्य बीजेपी अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य (Samik Bhattacharya) ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस सरकार पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि यह सरकार “उधार के समय पर चल रही है” और जनता ने इसे लगभग पूरी तरह नकार दिया है। भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि राज्य में लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हो चुकी है और कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। उनके अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक हिंसा के मामले बढ़े हैं और आम लोगों में भय का माहौल बना हुआ है।
उन्होंने दावा किया कि 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद कई राजनीतिक घटनाएं हुईं, जिनमें बीजेपी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाए जाने के आरोप लगे। उनका कहना है कि विपक्षी दलों की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है और प्रशासनिक निष्क्रियता भी चिंता का विषय है।
बीजेपी अध्यक्ष ने यह भी कहा कि जब ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने 2011 में वाम मोर्चे की 34 साल पुरानी सरकार को “लोकतंत्र बहाल करने” के नारे के साथ हटाया था, तब जनता को बड़े बदलाव की उम्मीद थी। लेकिन उनके अनुसार, समय के साथ वही व्यवस्था सत्ता-केंद्रित और दबाव की राजनीति में बदल गई। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में “सिंडिकेट राज” जैसी व्यवस्थाएं मजबूत हुई हैं, जिससे आम नागरिकों और व्यवसायियों पर असर पड़ा है। इसके साथ ही उन्होंने प्रशासन और लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच बढ़ते टकराव की ओर भी इशारा किया।
आर्थिक मुद्दों पर बोलते हुए शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य का कर्ज लगातार बढ़ रहा है और उद्योगों का पलायन गंभीर चिंता का विषय है। उनके अनुसार, कई कंपनियां राज्य छोड़ चुकी हैं या बंद हो गई हैं, जिससे रोजगार के अवसर कम हुए हैं। उन्होंने टाटा मोटर्स (Tata Motors) के सिंगुर (Singur) से बाहर जाने और नंदीग्राम (Nandigram) आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि इन घटनाओं ने निवेशकों के भरोसे को नुकसान पहुंचाया है और राज्य का औद्योगिक माहौल प्रभावित हुआ है।
शमिक भट्टाचार्य ने यह भी आरोप लगाया कि टीएमसी अन्य राज्यों में बंगला भाषी लोगों के मुद्दे को राजनीतिक रूप से उठाकर एक “झूठा नैरेटिव” बना रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि राज्य से प्रतिभा, पूंजी और श्रम का लगातार पलायन हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता अब बदलाव चाहती है और आने वाले समय में राजनीतिक परिवर्तन देखने को मिल सकता है। इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छिड़ने की संभावना है।