नई दिल्लीः साइबर ठगी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई ने शनिवार को तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में पांच अलग-अलग स्थानों पर एक साथ छापेमारी की।
इस कार्रवाई में एक बैंक अधिकारी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें इंडसइंड बैंक के एक सहायक प्रबंधक भी शामिल हैं। इन सभी पर “डिजिटल अरेस्ट” धोखाधड़ी गिरोह से जुड़े होने का आरोप है, जिसने एक वरिष्ठ नागरिक से 1.6 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की।
यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद की गई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि बैंकिंग तंत्र का दुरुपयोग कर रहे साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया जा रहा है।
जांच के अनुसार, “डिजिटल अरेस्ट” एक सुनियोजित ठगी का तरीका है, जिसमें अपराधी खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसियों का अधिकारी बताकर पीड़ित को वीडियो कॉल पर लगातार निगरानी में रखते हैं और उसे “समझौता राशि” देने के लिए मजबूर करते हैं।
मामले में एक वरिष्ठ नागरिक को कानूनी कार्रवाई के डर से 1.6 करोड़ रुपये से अधिक की रकम स्थानांतरित करने के लिए दबाव में लाया गया। जांच में सामने आया कि इंडसइंड बैंक के सहायक प्रबंधक ने कथित तौर पर एक फर्जी कॉर्पोरेट बैंक खाता खुलवाने में मदद की, जिसका इस्तेमाल ठगी की रकम जमा करने के मुख्य माध्यम के रूप में किया गया।
अन्य दो अभियुक्तों को “म्यूल अकाउंट” संचालित करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। ये ऐसे सहायक बैंक खाते होते हैं, जिनका उपयोग धन को अलग-अलग खातों में घुमाकर उसकी वास्तविक स्रोत और गंतव्य को छिपाने के लिए किया जाता है।
छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी ने अभियुक्तों के ठिकानों से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। माना जा रहा है कि इससे इस गिरोह के व्यापक नेटवर्क और अन्य संभावित पीड़ितों के बारे में जानकारी मिल सकती है। सीबीआई ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि वह उन सभी व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी, जो बैंकिंग प्रणाली का दुरुपयोग कर साइबर अपराधों को बढ़ावा देते हैं।
एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई कानूनी व्यवस्था भारत में मौजूद नहीं है। किसी भी नागरिक को वीडियो कॉल या फोन के माध्यम से गिरफ्तार करने का कोई प्रावधान नहीं है। यदि कोई व्यक्ति खुद को सीबीआई, पुलिस या कस्टम का अधिकारी बताकर फोन पर पैसे की मांग करता है, तो उस पर भरोसा न करें। किसी भी संदिग्ध कॉल, धमकी या फर्जी निवेश योजना से जुड़े मामलों की तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या स्थानीय पुलिस को सूचना देने की सलाह दी गई है। फिलहाल तीनों अभियुक्त हिरासत में हैं और जांच एजेंसी इस गिरोह के पूरे नेटवर्क तथा इसमें शामिल अन्य संभावित बैंक अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है।