नई दिल्ली: महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के लोकसभा में पारित न हो पाने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने विपक्ष को घेरते हुए देशभर में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू करने का फैसला किया है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस मुद्दे को सीधे तौर पर महिलाओं के अधिकारों से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की रणनीति बना रही है। पार्टी ने अपने सभी राज्य संगठनों को निर्देश दिए हैं कि वे जिला स्तर तक अभियान चलाकर व्यापक जनसमर्थन जुटाएं। इस दौरान सोशल मीडिया और जमीनी स्तर दोनों पर सक्रियता बढ़ाई जाएगी, जिसमें महिला मोर्चा की अहम भूमिका रहेगी।
इसी बीच, संसद परिसर में NDA की एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक भी हुई, जिसमें सहयोगी दलों के शीर्ष नेताओं ने भाग लिया। बैठक में आगे की रणनीति, राजनीतिक संदेश और आगामी चुनावों में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने पर सहमति बनी।
लोकसभा में हुए मतदान में विधेयक को साधारण बहुमत तो मिला, लेकिन संवैधानिक संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई समर्थन नहीं जुट पाया। कुल 528 सदस्यों ने मतदान किया, जिनमें 298 ने पक्ष में और 230 ने विरोध में वोट दिया। इसी कारण विधेयक पारित नहीं हो सका।
प्रस्तावित प्रावधानों के तहत 2029 से पहले महिला आरक्षण लागू करने के लिए लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने और परिसीमन की नई प्रक्रिया अपनाने की योजना थी। इसके साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने का लक्ष्य भी रखा गया था। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि आवश्यक बहुमत न मिलने के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका। हालांकि, सरकार ने यह संकेत दिया है कि महिला आरक्षण को लागू करने की प्रतिबद्धता बरकरार रहेगी और इसे लेकर जनता के बीच समर्थन जुटाया जाएगा।