पेरिसः होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जो दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग है, उसे फिर से खोलने को लेकर वैश्विक स्तर पर बड़ी पहल शुरू हुई है। इस मुद्दे पर फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें करीब 50 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने एक साथ हिस्सा लिया।
इस बैठक का नेतृत्व फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) ने किया। इसमें 50 देशों की भागीदारी ने इसे एक बड़ी वैश्विक एकजुटता के रूप में पेश किया। हालांकि, इस पहल में अमेरिका (United States) शामिल नहीं हुआ।
दरअसल, 28 फरवरी को शुरू हुए संघर्ष के बाद ईरान (Iran) ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को प्रभावी रूप से बंद कर दिया था। इस वजह से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हुआ है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार और व्यापार पर बड़ा असर पड़ा है।
बैठक में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज (Friedrich Merz) और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी (Giorgia Meloni) भी शामिल हुईं, जबकि कई अन्य देशों के प्रतिनिधियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हिस्सा लिया।
फ्रांस और ब्रिटेन इस पहल को “होर्मुज समुद्री आवागमन स्वतंत्रता पहल (Strait of Hormuz Maritime Freedom of Navigation Initiative)” के नाम से आगे बढ़ा रहे हैं। इसका उद्देश्य इस रणनीतिक मार्ग को फिर से सुरक्षित बनाकर व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को सामान्य करना है।
राष्ट्रपति मैक्रों ने स्पष्ट किया कि यह मिशन पूरी तरह रक्षात्मक होगा और इसमें केवल वे देश शामिल होंगे जो किसी भी संघर्ष का हिस्सा नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खुफिया जानकारी, समुद्र में बिछी बारूदी सुरंगों को हटाना, सैन्य सुरक्षा और तटीय देशों के साथ समन्वय जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री स्टार्मर ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत और बिना शर्त खोलना पूरी दुनिया की जिम्मेदारी है, ताकि ऊर्जा और व्यापार की सप्लाई सामान्य हो सके।
इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी की घोषणा ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। अमेरिका इस पूरी पहल से अलग है, जिससे यूरोपीय देशों की स्वतंत्र रणनीति सामने आ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मिशन में बड़े युद्धपोतों की तैनाती के बजाय माइन हटाने, चेतावनी प्रणाली विकसित करने और समुद्री सुरक्षा तकनीक पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा।
कुल मिलाकर, पेरिस में हुई यह बैठक केवल एक समुद्री मार्ग खोलने की कोशिश नहीं है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और बदलते अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन का भी संकेत देती है।