भुवनेश्वरः ओडिशा में डिलिमिटेशन बिल को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म होता जा रहा है। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने बीजद प्रमुख नवीन पटनायक (Naveen Patnaik) पर आरोप लगाया है कि वे इस मुद्दे पर जनता को गुमराह और भयभीत करने की कोशिश कर रहे हैं।
दरअसल, पटनायक ने राज्य के 31 सांसदों को पत्र लिखकर डिलिमिटेशन बिल के खिलाफ एकजुट होने की अपील की थी। उन्होंने आशंका जताई थी कि इस बिल से ओडिशा के राजनीतिक और आर्थिक हित प्रभावित हो सकते हैं।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि विपक्ष के नेता का यह पत्र “भय का माहौल बनाने” का प्रयास है और इसमें किए गए दावे पूरी तरह गलत हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ओडिशा के हितों से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
केंद्र सरकार द्वारा 16 अप्रैल को लोकसभा में पेश किए गए 131वां संविधान संशोधन विधेयक (131st Constitutional Amendment Bill) का उद्देश्य लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करना है। इस प्रस्ताव को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं।
धर्मेंद्र प्रधान ने भरोसा जताया कि नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और अमित शाह (Amit Shah) के नेतृत्व में किसी भी राज्य के अधिकारों की अनदेखी नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि संसद में गृह मंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि सभी राज्यों के हित सुरक्षित रहेंगे।
ओडिशा के प्रतिनिधित्व को लेकर उठी चिंताओं को भी उन्होंने खारिज किया। नवीन पटनायक द्वारा जताई गई यह आशंका कि राज्य का लोकसभा में प्रतिनिधित्व 3.9 प्रतिशत से घटकर 3.4 प्रतिशत हो सकता है, को उन्होंने पूरी तरह निराधार बताया।
इस बीच, प्रधान ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर बीजद के समर्थन का स्वागत भी किया। महिला आरक्षण बिल (Women's Reservation Bill) को उन्होंने देशभर की महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया और सभी दलों से इसे समर्थन देने की अपील की।
हालांकि, पटनायक ने इस बिल का समर्थन करते हुए यह मांग भी रखी है कि इसे डिलिमिटेशन प्रक्रिया से अलग किया जाए।
डिलिमिटेशन बिल को लेकर जारी यह बहस अब सिर्फ विधायी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह राज्य बनाम केंद्र और राजनीतिक रणनीति के नए आयामों को भी उजागर कर रही है। आने वाले समय में यह मुद्दा और गहराने के संकेत दे रहा है।