रांची: झारखंड में आबकारी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक मामले को लेकर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। पेपर लीक के इस मामले ने झारखंड की राजनीति को गर्मा दिया है, जहां एक ओर विपक्ष सीबीआई जांच की मांग कर रहा है, वहीं सरकार अपनी एजेंसियों पर भरोसा जताते हुए निष्पक्ष जांच का दावा कर रही है।
मुख्यमंत्री से सीबीआई जांच की सिफारिश करने की अपील
भाजपा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया है कि वे इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की सिफारिश करें। पार्टी का कहना है कि इस मामले में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।
159 अभ्यर्थियों समेत कई लोगों की गिरफ्तारी
यह मांग ऐसे समय में उठी है जब 12 अप्रैल को रांची में झारखंड एक्साइज कांस्टेबल प्रतियोगी परीक्षा (JECCE) 2023 से जुड़े कथित पेपर लीक मामले में 159 परीक्षार्थियों और पांच अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इस कार्रवाई ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
भाजपा का आरोप-मामले के पीछे बड़ा घोटाला
राज्य विधानसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने आरोप लगाया कि यह मामला किसी बड़े घोटाले की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन की जल्दबाजी और जांच का तरीका संदेह पैदा करता है कि इसके पीछे व्यापक स्तर पर अनियमितताएं हो सकती हैं।
एक ही केंद्र से बड़ी संख्या में गिरफ्तारी पर सवाल
नवीन जायसवाल ने यह भी कहा कि एक ही परीक्षा केंद्र से इतने अधिक लोगों की गिरफ्तारी होना गंभीर गड़बड़ी की ओर संकेत करता है। उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों के बीच इस पूरे मामले को लेकर संदेह का माहौल है, इसलिए निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जांच जरूरी है।
कांग्रेस का जवाब-राज्य एजेंसियां सक्षम
भाजपा की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए सत्तारूढ़ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने कहा कि राज्य की एजेंसियां इस मामले की जांच करने में पूरी तरह सक्षम हैं। पार्टी के प्रवक्ता सोनल शांति ने कहा कि परीक्षा से पहले ही 100 से अधिक अभ्यर्थियों और मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी यह दिखाती है कि सरकार निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
सरकार का भरोसा-मामले की तह तक पहुंचेगी जांच
कांग्रेस प्रवक्ता ने यह भी कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के नेतृत्व वाली सरकार इस मामले की गहराई तक जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।