नई दिल्लीः लोकसभा में महिला आरक्षण और डीलिमिटेशन बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक “पजल” जैसा बयान देकर राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया। राहुल गांधी ने सदन में कहा कि प्रधानमंत्री के भाषण में “कम ऊर्जा” दिखाई दी और उन्होंने इसे एक खास संख्या ‘16’ से जोड़ते हुए कहा कि “इस पहेली का पूरा उत्तर नंबर 16 में छिपा है।” बाद में संसद परिसर में मीडिया से बातचीत में उन्होंने इसे एक “पजल” बताते हुए कहा कि इसका जवाब वह अभी सार्वजनिक नहीं करेंगे।
कांग्रेस ने भी इस संदर्भ को आगे बढ़ाते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, जिसमें ‘16’ को लेकर एक संकेतात्मक टिप्पणी की गई और इसे एक “पहेली” के रूप में प्रस्तुत किया गया।
राहुल के आरोप और सामाजिक प्रतिनिधित्व पर सवाल
अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने सरकार पर सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश के कॉरपोरेट और वित्तीय ढांचे में दलितों, ओबीसी और आदिवासियों की भागीदारी बेहद सीमित है। उन्होंने आरोप लगाया कि सार्वजनिक क्षेत्र में इन वर्गों के लिए जो स्थान पहले उपलब्ध था, उसे कमजोर किया गया है। राहुल गांधी के अनुसार, सत्ता संरचना में इन समुदायों को अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है।
निशिकांत दुबे का तीखा पलटवार और ‘17 अप्रैल’ का जवाब
राहुल गांधी के बयान के तुरंत बाद बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कड़ा पलटवार किया और इस पूरे घटनाक्रम को “राजनीतिक ड्रामा” करार दिया। उन्होंने ‘17 अप्रैल’ की तारीख को लेकर कांग्रेस पर हमला करते हुए इसे “कांग्रेस का काला अध्याय” बताया।
निशिकांत दुबे ने अपने बयान में कई ऐतिहासिक राजनीतिक घटनाओं का उल्लेख किया, जिनमें बोफोर्स मामला, राजनीतिक सत्ता परिवर्तन और कांग्रेस नेतृत्व से जुड़े विवाद शामिल थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस बार-बार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर सवाल उठाती रही है और सत्ता से बाहर होने के बावजूद बीजेपी ने अपनी “नैतिकता और ईमानदारी” बनाए रखी है।
लोकसभा में चल रही विधायी बहसों के बीच राहुल गांधी के ‘पजल बयान’ और निशिकांत दुबे के जवाब ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्म कर दिया है, जिससे कांग्रेस और बीजेपी के बीच जुबानी जंग एक बार फिर तेज हो गई है।