नई दिल्ली: लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े तीनों संविधान संशोधन विधेयक पारित न हो पाने के बाद राजनीतिक हलकों में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार आगे क्या कदम उठाएगी।
सरकार ने इस मुद्दे पर विपक्ष के खिलाफ तीखा रुख अपनाया है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने जानबूझकर महिलाओं को संसद में उचित प्रतिनिधित्व देने की प्रक्रिया को रोक दिया।
सूत्रों के अनुसार इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन देशभर में एक व्यापक जनसंपर्क अभियान शुरू करने पर विचार कर रहा है। इस अभियान में खास तौर पर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों को महिलाओं के विकास में बाधा के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। इसी रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए शीर्ष नेताओं की एक अहम बैठक भी संसद भवन में हुई है। साथ ही केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में भी इस विषय पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद में इस झटके के बाद सरकार कोई नई रणनीति या अप्रत्याशित कदम उठा सकती है, जिस पर सबकी नजर बनी हुई है।
इस संदर्भ में पूर्व लोकसभा महासचिव और संविधान विशेषज्ञ पी. डी. टी. आचार्य की टिप्पणी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उनके अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान दिया गया “400 पार” का नारा एक स्पष्ट राजनीतिक गणना पर आधारित था।
आचार्य के मुताबिक 543 सदस्यीय लोक सभा में किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए लगभग 360 मतों की आवश्यकता होती है। इसी कारण मजबूत बहुमत हासिल करने के उद्देश्य से “400 पार” का लक्ष्य सामने रखा गया था।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में कांग्रेस के पास 400 से अधिक सीटें थीं, जिससे उस समय संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं आई।
आचार्य का यह भी मानना है कि वर्तमान स्थिति की पृष्ठभूमि 2024 के लोकसभा चुनाव परिणामों के साथ ही तैयार हो गई थी। इसी वजह से अब सरकार आवश्यक समर्थन जुटाने में असफल रही।
अब सबकी निगाह इस बात पर टिकी है कि सरकार आगे क्या रणनीति अपनाती है-क्या राजनीतिक टकराव और तेज होगा या कोई नया रास्ता निकलेगा।