राज्य में विधानसभा चुनाव के पहले चरण से ठीक 2 दिनों पहले ही उत्तर बंगाल में एक बार फिर से खून के छीटें पड़ गए। चुनाव आयोग की कड़ी निगरानी, रिकॉर्ड संख्या में केंद्रीय बलों की तैनाती आदि व्यवस्थाओं के बीच फिर से बंगाल की धरती खून से लाल हुई।
आरोप है कि साल उत्तर दिनाजपुर के इस्लामपुर में एक CPIM कार्यकर्ता की हत्या कर दी गयी है। मृतक का नाम नूर आजम (22) बताया जाता है। घटना की वजह से इलाके में तनाव फैल गया है।
स्थानीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सोमवार की शाम को घर के पास ही नूर आजम पर हमला किया गया। गंभीर रूप से घायल अवस्था में उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद से ही इलाके में तनाव का माहौल है। पुलिस और केंद्रीय बल ने इलाके की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।
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गौरतलब है कि राज्य में शांतिपूर्ण चुनाव के लिए आयोग ने कई बैठकें की जिसके बाद महत्वपूर्ण कदम भी उठाए गए- बूथों पर केंद्रीय बलों की तैनाती, लाइव वेब कास्टिंग, माइक्रो ऑब्जर्वर इत्यादि। इसके बावजूद पहले चरण के चुनाव से पहले ही फैली हिंसा ने प्रशासन की तैयारियों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
घटना को केंद्र कर राजनैतिक तनाव भी बढ़ने लगा है। इन सबके बीच आम जनता में एक ही बात को लेकर हताशा देखी जा रही है- इतनी सख्ती, केंद्रीय बलों की तैनाती और सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद हिंसा क्यों नहीं रोकी जा सकी? बंगाल में चुनाव का पहला चरण ही अभी बाकी है। आगे क्या होगा, लोग इसी आशंका में जी रहे हैं।