विधानसभा चुनाव से मात्र 2 दिनों पहले नंदीग्राम में पुलिस पर्यवेक्षक को हटा दिया गया है। चुनाव की तारीखों की घोषणा होने के बाद आयोग ने विभिन्न जगहों पर पुलिस पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की थी। उस समय नंदीग्राम की जिम्मेदारी हितेश चौधरी को सौंपी गयी थी।
23 अप्रैल को मतदान से महज कुछ घंटों पहले ही उन्हें हटा दिया गया है। उनकी जगह अब पुलिस पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी अखिलेश सिंह को सौंपी गयी है। लेकिन हितेश चौधरी को क्यों हटाया गया?
इस बारे में चुनाव आयोग ने कुछ भी स्पष्ट रूप से जानकारी नहीं दी है। इससे पहले भी कई जगहों पर पुलिस पर्यवेक्षकों की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों को सौंपी गयी थी, उन्हें बदला गया है। गौर करने वाली बात है कि राज्य की कानून-व्यवस्था की कमान संभालने के बाद आयोग ने जिन पुलिस अधिकारियों को पर्यवेक्षकों की जिम्मेदारी सौंपी थी, उन्हें बदला जा रहा है।
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इसी महीने कुचबिहार के पुलिस पर्यवेक्षक को भी बदल दिया गया। आरोप था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ हुई बैठक के दौरान उक्त पर्यवेक्षक उनके अधिकारक्षेत्र में कितने मतदान केंद्र हैं, यह जानकारी नहीं दे सके थे। इससे नाराज होकर ज्ञानेश कुमार ने उन्हें हटाने का आदेश दिया था।
इससे पहले मार्च में मालदह के चार विधानसभा केंद्र माणिकचक, मोथाबाड़ी, सुजापुर और वैष्णनगर में पुलिस पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी संभाल रहे जयंत कांत को आयोग ने हटा दिया था। तृणमूल ने जयंत के खिलाफ आरोप लगाया था कि उनकी पत्नी उत्तर प्रदेश में भाजपा की नेता हैं।
इसके साथ ही जंगीपुर, रघुनाथगंज, सागरदिघी, जामुड़िया, आसनसोल दक्षिण, आसनसोल उत्तर, कुल्टी और बाराबनी में भी नए पुलिस पर्यवेक्षक को जिम्मेदारी सौंपी गयी थी। खड़गपुर सदर, खड़गपुर, पिंगला और डेबरा में भी पुलिस पर्यवेक्षकों को बदला गया था।