नई दिल्ली: कुख्यात अपराधी लॉरेंस बिश्नोई के नेतृत्व वाले कथित संगठित आपराधिक गिरोह के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (एमसीओसीए) के तहत दर्ज मामले में अदालत ने आरोप तय कर दिए हैं। इसके साथ ही कुल 20 आरोपियों के खिलाफ विधिवत सुनवाई (ट्रायल) का रास्ता साफ हो गया है।
यह मामला एमसीओसीए की धारा 3 और 4 के साथ-साथ शस्त्र अधिनियम और विस्फोटक अधिनियम के प्रावधानों के तहत दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। अदालत द्वारा सभी 20 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जाने के बाद अब इस कथित अंतरराज्यीय संगठित अपराध सिंडिकेट के खिलाफ विस्तृत सुनवाई की प्रक्रिया शुरू होगी। इस मामले का केंद्र एक संगठित और मजबूत आपराधिक नेटवर्क है, जिसका नेतृत्व लॉरेंस बिश्नोई कर रहा है। इस गिरोह में संदीप उर्फ काला जठेड़ी, संपत नेहरा, राजकुमार उर्फ राजू बसोदी, वीरेंद्र प्रताप उर्फ काला राणा, नरेश उर्फ सेठी, अनिल उर्फ लीला, प्रियव्रत उर्फ काला/फौजी, सचिन उर्फ भांजा, अक्षय उर्फ पलड़ा सहित अन्य सदस्य शामिल हैं। इन सभी के खिलाफ अब औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए गए हैं।
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अधिवक्ता अखंड प्रताप ने अदालत में दलील दी कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री स्पष्ट रूप से यह साबित करती है कि यह एक संगठित आपराधिक गिरोह है, जो कई राज्यों में सक्रिय है और इस पर एमसीओसीए जैसे कड़े कानून के तहत मुकदमा चलाया जाना उचित है। यह प्राथमिकी मार्च 2021 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा एमसीओसीए की धारा 23 के तहत पूर्व स्वीकृति प्राप्त करने के बाद दर्ज की गई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, बिश्नोई–काला जठेड़ी सिंडिकेट का नेटवर्क दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और अन्य क्षेत्रों तक फैला हुआ था।
जांच में यह आरोप लगाया गया है कि यह सिंडिकेट व्यवस्थित रूप से जबरन वसूली, सुपारी लेकर हत्या, अवैध हथियारों की तस्करी और आतंक के जरिए धमकाने जैसी आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा। यह गिरोह व्यापारियों और स्थानीय कारोबारियों को निशाना बनाकर उनसे सुरक्षा के नाम पर पैसे वसूलता था। गवाहों के बयान और आरोपियों के कबूलनामों से यह संकेत मिला है कि गिरोह एक संगठित ढांचे के तहत काम करता था, जिसमें जबरन वसूली से प्राप्त धन का उपयोग आधुनिक और घातक हथियार खरीदने तथा गिरोह के संचालन को बनाए रखने में किया जाता था।
आरोप पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि लॉरेंस बिश्नोई सहित कई आरोपी जेल में बंद रहने के बावजूद तस्करी के जरिए लाए गए मोबाइल फोन का उपयोग कर गिरोह का संचालन जारी रखे हुए थे। वे भारत और विदेशों में मौजूद अपने सहयोगियों के माध्यम से आपराधिक गतिविधियों को निर्देशित करते थे। जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह के तार कनाडा और थाईलैंड जैसे विदेशी स्थानों से भी जुड़े हुए हैं, जो इसके अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैले नेटवर्क को दर्शाते हैं।
मामले में पुलिस द्वारा पिस्तौल, असॉल्ट राइफल, ग्रेनेड, डेटोनेटर और बड़ी मात्रा में जिंदा कारतूस जैसे हथियारों की बरामदगी को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो गिरोह की कार्यक्षमता और क्षमता को दर्शाते हैं। अब जब अदालत ने सभी 20 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं, तो मामला सुनवाई के चरण में प्रवेश कर चुका है, जहां अभियोजन पक्ष इस संगठित अपराध सिंडिकेट की पूरी संरचना और प्रत्येक आरोपी की भूमिका को साबित करने का प्रयास करेगा।