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15 जुलाई तक मॉर्निंग स्कूल का वायरल आदेश फर्जी, सरकार ने जारी नहीं की नई अधिसूचना

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ कथित सरकारी पत्र, जांच में फर्जी निकला; शिक्षा विभाग ने नई अधिसूचना जारी होने से किया इनकार।

कोलकाताः पश्चिम बंगाल में 15 जुलाई तक मॉर्निंग स्कूल जारी रखने का दावा करने वाला एक कथित सरकारी आदेश सोमवार को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस पत्र में दावा किया गया था कि भीषण गर्मी को देखते हुए राज्य सरकार ने मॉर्निंग स्कूल की अवधि 15 जुलाई तक बढ़ा दी है। हालांकि, जांच में यह दस्तावेज पूरी तरह फर्जी निकला। राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की ओर से ऐसी कोई नई अधिसूचना जारी नहीं की गई है।

दरअसल, पिछले कुछ सप्ताह से राज्य में गर्मी और उमस के कारण स्कूलों में मॉर्निंग शिफ्ट में कक्षाएं संचालित की जा रही थीं। सरकार ने पहले इस व्यवस्था को 30 जून तक लागू रखने का आदेश दिया था। इसी वास्तविक आदेश की तर्ज पर किसी ने नया फर्जी पत्र तैयार कर सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दिया, जिससे अभिभावकों, विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।

मानसून के बीच वायरल आदेश पर उठे सवाल

इस बीच राज्य में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और अधिकांश जिलों में नियमित बारिश हो रही है। ऐसे में शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने भी सवाल उठाया कि जब मौसम में बदलाव आ चुका है, तब केवल गर्मी के आधार पर मॉर्निंग स्कूल की अवधि बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं बनता। इसी वजह से वायरल आदेश की सत्यता पर संदेह भी जताया गया।

पुराने आदेश की भाषा का किया गया इस्तेमाल

जांच में सामने आया कि वायरल पत्र में लगभग वही भाषा, वही कारण और वही निर्देश लिखे गए थे, जो पहले जारी वास्तविक सरकारी अधिसूचना में थे। इसी समानता के कारण शुरुआत में कई लोगों ने इसे सही मान लिया। बाद में पुष्टि होने पर स्पष्ट हुआ कि यह दस्तावेज फर्जी है और इसे भ्रामक तरीके से प्रसारित किया गया।

30 जून तक ही प्रभावी है सरकारी आदेश

स्कूल शिक्षा विभाग ने 1 जून को पहली बार मॉर्निंग स्कूल को लेकर निर्देश जारी किया था। इसमें जिलों की स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार स्कूलों को सुबह की पाली में कक्षाएं संचालित करने की अनुमति दी गई थी। बाद में इस व्यवस्था को 30 जून तक बढ़ाया गया। इसके बाद सरकार की ओर से कोई नया आदेश जारी नहीं किया गया है। इसलिए 15 जुलाई तक मॉर्निंग स्कूल जारी रहने का दावा पूरी तरह निराधार और भ्रामक है।

शिक्षा विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे केवल सरकारी स्रोतों से जारी आदेशों पर ही भरोसा करें और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे अपुष्ट दस्तावेजों को बिना सत्यापन के साझा न करें।

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