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यमुना जल समझौता: हरियाणा और राजस्थान के बीच ऐतिहासिक करार, अतिरिक्त पानी के उपयोग पर बनी सहमति

हरियाणा-राजस्थान यमुना जल परियोजना पर बड़ा फैसला, 34,102 करोड़ की योजना को मिली मंजूरी

नई दिल्ली : हरियाणा और राजस्थान के बीच यमुना जल परियोजना को लेकर लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध का अंत हो गया है। दोनों राज्यों ने केंद्र सरकार की मौजूदगी में एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका उद्देश्य अतिरिक्त वर्षा जल का बेहतर उपयोग कर उसे पीने के पानी के रूप में उपलब्ध कराना है।

इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि यह समझौता राज्यों के बीच सहयोग की भावना को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त जल संसाधनों को व्यर्थ बहने देने के बजाय उनका सही उपयोग किया जाना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोगों को पीने का पानी मिल सके।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि राजस्थान ने जुलाई से अक्टूबर के बीच आने वाले वर्षा जल को पाइपलाइन के माध्यम से पीने के पानी के रूप में उपयोग करने का अनुरोध किया था। इस पर विचार के बाद यह निर्णय लिया गया कि हरियाणा के हतिनीकुंड बैराज से अतिरिक्त पानी को पाइपलाइन के जरिए राजस्थान तक पहुंचाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे अतिरिक्त पानी का उपयोग सुनिश्चित होगा, जो अन्यथा बेकार बह जाता। उन्होंने इसे साझा जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि यदि किसी अन्य राज्य को पानी की आवश्यकता है, तो उसे उपलब्ध कराना सभी की जिम्मेदारी है।

वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि जल सुरक्षा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के विजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केंद्र और राज्यों के सहयोग से संभव हो सकी है।

इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की उपस्थिति में यह समझौता हुआ। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने दोनों मंत्रियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि उनकी भूमिका के कारण वर्षों पुराना विवाद सुलझ सका।

समझौते के अनुसार हरियाणा के हतिनीकुंड बैराज से राजस्थान के लिए 577 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) यमुना जल को 295.5 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से चूरू जिले के हंसियावास जलाशय तक पहुंचाया जाएगा।

इस परियोजना में तीन पाइपलाइन शामिल होंगी, जिनका व्यास 3.6 मीटर होगा। इसके साथ ही निरीक्षण मोटरवे, कृत्रिम जलाशय और आधुनिक डिजिटल जल प्रबंधन प्रणाली भी विकसित की जाएगी। इस परियोजना के तहत हरियाणा के दस स्थानों पर पेयजल आपूर्ति का भी प्रावधान किया गया है।

राजस्थान सरकार के अनुसार, परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) केंद्रीय जल आयोग के ई-पीएएमएस पोर्टल पर अपलोड कर दी गई है, जबकि हरियाणा सरकार ने पाइपलाइन संरेखण को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

इस पूरे प्रोजेक्ट के संचालन, कार्यान्वयन और रखरखाव के लिए एक विशेष प्रयोजन इकाई (एसपीवी) “राजस्थान-हरियाणा यमुना जल परियोजना एसपीवी (आरएचवाईडब्ल्यू-एसपीवी)” का गठन किया जाएगा।


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