विधायत हुमायूं कबीर के बयानों पर विधानसभा में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी प्रकार के भड़काऊ वक्तव्यों को यह सरकार बर्दास्त नहीं करेगी। सोमवार (29 जून) को शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने बताया कि हुमायूं कबीर के खिलाफ 2 FIR दर्ज किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि इस तरह से बेलगाम बयान किसी को नहीं देने दूंगा। इसके साथ ही उन्होंने इस बात को तीन बार दोहराते हुए कहा, 'नहीं बोलने दूंगा... नहीं बोलने दूंगा... नहीं बोलने दूंगा।' उन्होंने आगे कहा कि समय आ गया है कि इस तरह के लोगों को सबक सिखाने का।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि आपसे स्पष्ट कह रहा हूं कि ममता बनर्जी मुख्यमंत्री नहीं हैं। कमजोर मुख्यमंत्री पाकर आप जो मर्जी करते थे, जो दिल में आता था कह देते थे। मैं आपलोगों से कह रहा हूं, हमने दो FIR दर्ज करवाया है। एक रेजिनगर थाना में और एक शक्तिपुर थाना में।
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि संपूर्ण राजनैतिक एजेंडे के तहत ही मुर्शिदाबाद के नवदा के विधायक हुमायूं कबीर ने इस प्रकार का बयान दिया है। भरतपुर, रेजिनगर और नवदा के सभी चयनित पंचायत (किसी भी पार्टी की बोर्ड हो) को भंग कर उसके सदस्यों को हुमायूं अपनी पार्टी AJUP में ले जाना चाहते हैं।
ऐसा वह नहीं कर पा रहे हैं। इसके बाद शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि हुमायूं कबीर ने दो सीटें जीती हैं। नियमानुसार रेजिनगर से उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। अगले 2-3 महीनों में उप-चुनाव होने हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाते हुए कहा कि वहां अपने बेटे को जिताना चाहते हैं। वहां 72 प्रतिशत मुस्लिम वोट हैं। इस वोट को जीतने के लिए ही वह ऐसा खेल, खेल रहे हैं।
भाजपा सरकार किसी भी भड़काऊ बयान को बर्दास्त नहीं करेगी। यह बताते हुए शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार (29 जून) को अधिवेशन कक्ष में 3 उदाहरण पेश किए। उन्होंने कहा कि संदेशखाली में एक व्यक्ति थे। 1 जनवरी 2024 को उन्होंने कहा था कि तत्कालीन विरोधी पार्टी के नेता आने पर उनका हाथ काट कर पैरों में और पैर काट कर हाथ में लगाऊंगा। चमड़ा छील कर मिदनापुर भेज दूंगा।
उसकी क्या हालत हुई है, यह सभी ने देखा। उसका भी यहीं टोन था। एक और था जीवनतला का गुंडा। कैनिंग का। उसकी हालत भी सभी ने देखी थी। एक था पुष्पा - झुकेगा नहीं। ऐसा झुका कि खाली पैर, हाफ पैंट पहनकर कान पकड़कर उठक-बैठक लगाते हुए जा रहा है।
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गौरतलब है कि इस विवाद की शुरुआत 8 जून को शक्तिपुर में और 26 जून को रेजिनगर में पार्टी की सभा में भाषण देते समय हुमायूं कबीर के बयान के बाद हुई।
हुमायूं कबीर ने क्या कहा था?
यहां वोट में हारने के बावजूद भाजपा को लगता है कि उनका ही विधायक है। मैंने शुभेंदु अधिकारी से कहा था कि आप चुनाव में जीते हैं, पार्टी जीती है...बहुत अच्छी बात है। लेकिन मुर्शिदाबाद में दखलंदाजी कम करने के लिए कहेंगे। इसके साथ ही उन्होंने धमकी भरे लहजे में भाजपा के लिए कहा कि जिस दिन मैदान में उतर जाऊंगा, उस दिन आपका झंडा पकड़ने वाला कोई नहीं रहेगा।
मैं खुद लाखों लोगों का नेतृत्व करते हुए सड़कों पर उतारूंगा और लाठीतोड़ मारूंगा। कितने दिनों तक जेल में रख सकेंगे, खिला सकेंगे देखूंगा...! जिस दिन मेरा दिमाग गर्म हो जाएगा, न तो मैं एसपी को मानूंगा और न ही मुख्यमंत्री को।
एक सप्ताह बाद ही शुभेंदु अधिकारी मुर्शिदाबाद जाने वाले हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं साबित कर दूंगा कि भारत में संविधान, कानून का ही शासन है। कोई भी शेखी बघारने वाला सर्वोपरी नहीं है।
मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि संयत होने, सतर्क होने और इस तरह की बातें न कहने व भविष्य में ऐसी बयानबाजी से पहले कम से कम 25 बार सोचने के लिए कहूंगा। जिन लोगों ने उन्हें सभा में बुलाया था, सबसे पहले उन्हें ही जेल भेजूंगा। उसके बाद आपके (हुमायूं कबीर) के पास जाऊंगा।
विधानसभा में शुभेंदु अधिकारी के संबोधन के बाद हुमायूं कबीर ने दावा करते हुए कहा कि मैंने तो राज्य सरकार के खिलाफ कुछ नहीं कहा था। मैंने भाजपा के बारे में कहा था। नवागत भाजपाईयों ने मेरे घर के पास जाकर मुझ पर हमला किया था। मैं क्या करूं? क्या राजनैतिक रूप से मैं आक्रमण नहीं करूंगा? किससे वह (शुभेंदु अधिकारी) माफी मांगने के लिए बोल रहे हैं, यह स्पष्ट करें। अगर बोलना हुआ तो निश्चित कहूंगा।