कोलकाता : अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) ने कोलकाता में संगठन के सह-उपाध्यक्ष पद पर रहे राधारमण दास को सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया है। राधारमण दास ने रविवार शाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी साझा करते हुए दावा किया कि अब वह किसी भी मंच से इस्कॉन का प्रतिनिधित्व नहीं कर पाएंगे।
राधारमण दास ने अपनी पोस्ट में कहा कि संगठन की ओर से उन्हें निर्देश दिया गया है कि वह इस्कॉन से जुड़े किसी भी विषय पर सार्वजनिक रूप से भाषण या बयान नहीं दे सकते। उन्होंने बताया कि उन्हें पदों से हटाए जाने के पीछे छह कारण बताए गए हैं।
राधारमण दास के अनुसार पहला कारण बांग्लादेश में हिंदुओं पर कथित अत्याचार के मुद्दे को लेकर मीडिया में उनकी बात रखना और चिन्मय कृष्ण के समर्थन में बयान देना बताया गया है। उनका दावा है कि इसी वजह को कार्रवाई का आधार बनाया गया।
उन्होंने बताया कि दूसरा कारण भारतीय जनता पार्टी की सांसद मेनका गांधी को कानूनी नोटिस भेजना बताया गया है। वहीं तीसरा कारण हास्य कलाकार सुरलीन कौर की एक टिप्पणी को लेकर आपत्ति जताना और उनके खिलाफ साइबर क्राइम में शिकायत दर्ज कराना बताया गया है।
राधारमण दास ने दावा किया कि चौथा कारण ‘सनातन निर्मूल’ विचारधारा के विरोध में सनातन धर्म के समर्थन में उनके द्वारा दिए गए भाषण हैं। उनका कहना है कि इस मुद्दे पर उनके सार्वजनिक विचार भी कार्रवाई की वजह बने।
उन्होंने पांचवें कारण के तौर पर वर्ष 1976 में न्यूयॉर्क में आयोजित रथयात्रा कार्यक्रम से जुड़े एक सोशल मीडिया पोस्ट का जिक्र किया। उनके अनुसार उन्होंने उस पोस्ट में तत्कालीन कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी साझा की थी, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप के जुड़ाव का उल्लेख था।
छठे कारण के रूप में राधारमण दास ने बताया कि 29 मई को उन्होंने एक समाचार चैनल को इंटरव्यू दिया था। उन्होंने अपने एक्स पोस्ट में उस इंटरव्यू का लिंक भी साझा किया। राधारमण दास के मुताबिक, उस बातचीत में उन्हें राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के बारे में कुछ प्रशंसात्मक बातें कहते हुए सुना गया था।
राधारमण दास ने अपनी पोस्ट में यह भी स्पष्ट किया कि अब वह इस्कॉन की ओर से किसी भी कार्यक्रम या मंच पर संगठन का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकेंगे। हालांकि इस मामले में संगठन की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।