पटना : बिहार के भोजपुर में कथित पुलिस मुठभेड़ में 28 वर्षीय भारत भूषण तिवारी की मौत के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मृतक के पिता काशीनाथ तिवारी ने बेटे की मौत को लेकर सवाल उठाते हुए न्याय की मांग की है। उन्होंने कहा कि घटना के तरीके को लेकर कई सवाल हैं और परिवार को निष्पक्ष जांच व जवाबदेही का इंतजार है।
भोजपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए काशीनाथ तिवारी ने कहा, “पूरी दुनिया देख रही थी कि उसे किस तरह मारा गया। अगर मुझे न्याय नहीं मिलेगा तो मुझे क्या मिलेगा? प्रशासन, न्याय व्यवस्था से जुड़े लोग, सभी देख रहे थे कि उसे कैसे मारा गया। इसमें छिपाने जैसी कोई बात नहीं है। कहा जा रहा है कि जांच होगी, लेकिन यह किसी को नहीं पता कि उसका परिणाम क्या होगा।”
उन्होंने जांच को लेकर भरोसे की कमी भी जाहिर की। काशीनाथ तिवारी का कहना है कि प्रशासन की ओर से जांच का आश्वासन दिया गया है, लेकिन परिवार अभी भी इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं है कि जांच का निष्कर्ष क्या होगा। उन्होंने मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और जवाबदेही की मांग की है।
भारत भूषण तिवारी बिहार के भोजपुर जिले के बिलौती गांव के रहने वाले थे। 17 जून 2026 को पुलिस के साथ हुई विवादित मुठभेड़ में उनकी मौत हो गई थी। वह छात्र होने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर सामाजिक मुद्दों को उठाने के लिए भी जाने जाते थे। बताया जाता है कि वह भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ आवाज उठाते थे।
भारत भूषण तिवारी ने जवानीयां गांव में बाढ़ प्रभावित लोगों के पुनर्वास को लेकर सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, सरकारी मदद नहीं मिलने से नाराज होकर उन्होंने सोशल मीडिया मंच फेसबुक पर कुछ वीडियो पोस्ट किए थे, जिनमें वह कथित तौर पर अवैध हथियार दिखाते हुए स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों को “मुठभेड़” की धमकी देते नजर आए थे। इसके बाद पुलिस ने उनके घर को घेर लिया था।
16 जून को भोजपुर पुलिस ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा था कि भारत भूषण तिवारी 'मानसिक रूप से अस्थिर' थे और पुलिस उन्हें निःशस्त्र कर इलाज के लिए मानसिक स्वास्थ्य केंद्र भेजने का प्रयास कर रही थी। इसके अगले दिन 17 जून को पुलिस और उनके बीच गतिरोध बढ़ गया, जिसके बाद गोलीबारी हुई और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
भोजपुर पुलिस का दावा है कि भारत भूषण तिवारी ने पुलिस टीम पर अवैध पिस्तौल से लगातार 8 से 10 गोलियां चलाईं, जिसके बाद आत्मरक्षा में एसटीएफ के जवानों को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी।
वहीं घटना से पहले फेसबुक लाइव के एक वीडियो को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। वीडियो में भारत भूषण तिवारी खुले मैदान में कैमरे से बात करते दिख रहे थे और कथित तौर पर पुलिस की ओर अपनी पिस्तौल फेंकते नजर आए। उनके परिवार और स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद पुलिस ने उन पर गोली चलाई।
इस घटना के बाद बिहार में राजनीतिक और कानूनी विवाद तेज हो गया है। बढ़ते जन आक्रोश और राजनीतिक दबाव के बीच बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच का आदेश दिया है। यह जांच सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीश के नेतृत्व में कराई जाएगी।
प्रशासन ने मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए स्थानीय थाने के स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) समेत चार पुलिस अधिकारियों को जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया है। अब पूरे मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मुठभेड़ की परिस्थितियां क्या थीं और किसकी जिम्मेदारी तय होती है।