नई दिल्ली: अल नीनो की संभावित मौसमी परिस्थितियां कृषि क्षेत्र के ऋण वितरण और वसूली को प्रभावित कर सकती हैं, लेकिन इससे भारतीय बैंकिंग प्रणाली पर कोई बड़ा नकारात्मक असर पड़ने की संभावना नहीं है। यस सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ मजबूत बनी रहेगी और ऋण लागत भी स्थिर रहने का अनुमान है।
एफवाई27 में ऋण लागत स्थिर रहने का अनुमान
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में ऋण लागत (क्रेडिट कॉस्ट) में वित्त वर्ष 2025-26 की तुलना में किसी उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना नहीं है। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2027-28 (एफवाई28) में एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस (ईसीएल) मानकों के लागू होने से भी बैंकिंग क्षेत्र पर किसी बड़े एकमुश्त प्रभाव की आशंका नहीं जताई गई है।
कृषि ऋण पर अल नीनो का रह सकता है असर
रिपोर्ट में कहा गया है कि बदलते मौसम के बीच कृषि ऋण पर विशेष नजर रखने की आवश्यकता होगी। इसमें कहा गया कि अल नीनो कुछ कृषि ऋणों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन पिछले अनुभव बताते हैं कि इसका असर व्यापक या गंभीर नहीं होगा। हालांकि, यदि सुपर अल नीनो जैसी स्थिति बनती है तो उस पर लगातार निगरानी रखनी होगी।
बैंकिंग क्षेत्र के सामने तीन प्रमुख चुनौतियां
यस सिक्योरिटीज ने बैंकिंग क्षेत्र के लिए तीन प्रमुख जोखिम बताए हैं। इनमें पश्चिम एशिया का संघर्ष, अल नीनो का प्रभाव और व्यापार शुल्क (ट्रेड टैरिफ) के विलंबित असर शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में इन तीनों कारकों पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा।
असुरक्षित ऋणों में दबाव घटने लगा
रिपोर्ट में कहा गया है कि असुरक्षित ऋण (अनसिक्योर्ड लोन) से जुड़ी ऋण लागत, जो पहले घरेलू आर्थिक सुस्ती और इस श्रेणी में अधिक तेजी के कारण बढ़ गई थी, अब धीरे-धीरे कम होने लगी है। हालांकि, नाममात्र जीडीपी वृद्धि में धीमी रिकवरी और माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र पर अल नीनो के संभावित असर के कारण इसमें कुछ दबाव बना रह सकता है।
एमएसएमई क्षेत्र पर भी रहेगी नजर
रिपोर्ट के अनुसार एमएसएमई ऋण भी निगरानी वाले क्षेत्रों में शामिल हैं, क्योंकि पश्चिम एशिया के संघर्ष और व्यापार संबंधी चुनौतियों का इस क्षेत्र पर असर पड़ सकता है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस क्षेत्र में बड़े स्तर पर तनाव बढ़ने की संभावना नहीं है। जरूरत पड़ने पर इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) सुरक्षा प्रदान कर सकती है।
क्रेडिट ग्रोथ बनी रहेगी मजबूत
यस सिक्योरिटीज का अनुमान है कि बैंकों की कुल ऋण वृद्धि (क्रेडिट ग्रोथ) संतोषजनक बनी रहेगी। इसे कॉरपोरेट ऋणों में बढ़ोतरी के साथ-साथ एमएसएमई और रिटेल लोन की लगातार मजबूत मांग का समर्थन मिलेगा। क्रेडिट ग्रोथ लगभग 17 प्रतिशत के स्तर तक पहुंच चुकी है, जिसका प्रमुख कारण कॉरपोरेट ऋण और एमएसएमई ऋण में बेहतर वृद्धि है। वित्त वर्ष के अंत तक इसमें कुछ नरमी आ सकती है, लेकिन इसके निम्न से मध्यम दोहरे अंक (Low-to-Mid Teens) के दायरे में बने रहने की संभावना है।
शुद्ध ब्याज आय में भी वृद्धि का अनुमान
रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि अध्ययन में शामिल बैंकों की नेट इंटरेस्ट इनकम (एनआईआई) की वृद्धि वित्त वर्ष 2025-26 के 5.3 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2026-27 में 16.1 प्रतिशत हो जाएगी। इसके बाद वित्त वर्ष 2027-28 में भी यह 16.1 प्रतिशत तथा वित्त वर्ष 2028-29 में 15.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है।