केई पन्योर : बादल फटने के बाद आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित अरुणाचल प्रदेश के केई पन्योर जिले में राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है। हादसे के चार दिन बाद रविवार को प्रशासन ने तीसरे पीड़ित का शव बरामद किया। वहीं लगातार हो रही बारिश के बीच प्रशासन ने घरों और अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान का विस्तृत आकलन शुरू कर दिया है।
केई पन्योर जिला प्रशासन ने हालिया फ्लैश फ्लड से हुए नुकसान की जांच के लिए एक सत्यापन समिति का गठन किया है। समिति को 29 जून को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी स्तर पर नुकसान की जांच करने और अपनी विस्तृत रिपोर्ट व सुझाव तत्काल उपायुक्त को सौंपने का निर्देश दिया गया है।
लगातार खराब मौसम को देखते हुए प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की अपील की है। अरुणाचल प्रदेश के ईस्ट कामेंग जिला प्रशासन ने भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के पूर्वानुमान के आधार पर 28 जून से 1 जुलाई तक गरज के साथ बारिश, बिजली गिरने और भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है।
उपायुक्त कार्यालय की ओर से जारी एडवाइजरी में लोगों से सुरक्षा नियमों का पालन करने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की गई है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि मौजूदा मौसम की स्थिति कमजोर इलाकों में भूस्खलन, अचानक बाढ़ और सामान्य जनजीवन में बाधा पैदा कर सकती है।
राहत शिविरों में रहने को मजबूर परिवार, बयां किया तबाही का मंजर
फ्लैश फ्लड से बचे लोगों ने उस भयावह समय को याद किया जब तेज बहाव वाला पानी उनके घरों, सामान और वर्षों की जमा पूंजी को अपने साथ बहा ले गया। जान बचाने के लिए कई परिवारों को अस्थायी राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है।
एनईईपीसीओ में कार्यरत 46 वर्षीय रूमी राभा अपने पति के साथ पोसा गांव के पास एनईईपीसीओ कॉलोनी में बने अस्थायी राहत शिविर में रह रही हैं। फ्लैश फ्लड में उनका सरकारी क्वार्टर पूरी तरह बह गया।
रूमी राभा ने बताया, "बहुत तेज बारिश लगातार हो रही थी। इसके बाद दीवार गिर गई और पानी सीधे घर में घुस आया। हम किसी तरह बाहर निकल पाए, लेकिन घर पूरी तरह बह गया। कुछ भी नहीं बचा। लोगों से मिलने वाले भोजन के सहारे गुजारा कर रहे हैं। घर में सामान, सोना और दूसरी चीजें थीं, लेकिन कुछ भी नहीं बचा। हम सिर्फ अपनी जान बचा सके।"
एक अन्य प्रभावित निवासी झंकेश्वरी शर्मा ने बताया कि उन्होंने और उनके पति ने किसी तरह अपनी जान बचाई, लेकिन वर्षों की मेहनत से बनाया घर और सामान कुछ ही मिनटों में पानी में बह गया।
उन्होंने कहा, "मैं सुबह 4 बजे से पहले उठ गई थी। कमरे में पानी भर चुका था। अंदर कुछ भी नहीं बचा। सिर्फ हम दोनों बच पाए। मैंने समय रहते अपने पति को भी बचा लिया। इतने वर्षों से यहां रह रही हूं, लेकिन ऐसा मंजर कभी नहीं देखा। इस बार हमारे पास कुछ भी नहीं बचा। पानी इतना बढ़ गया कि रास्ते में आने वाली हर चीज बह गई।"
बारिश और भूस्खलन से दहशत, प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
स्थानीय निवासी सजल पंडित ने बताया कि लगातार बारिश और बार-बार हो रहे भूस्खलन के कारण लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रशासन स्थिति सामान्य करने के लिए प्रयास कर रहा है, लेकिन खराब मौसम और गिरते पत्थरों के कारण लोगों में चिंता बनी हुई है।
सजल पंडित ने कहा कि प्रशासन समय-समय पर सड़कों को खोल रहा है और एंबुलेंस जैसे जरूरी वाहनों को प्राथमिकता दी जा रही है। आम लोगों को छोटे समूहों में आगे बढ़ने की अनुमति दी जा रही है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि जरूरी काम के अलावा यात्रा न करें। उन्होंने बताया कि याजली पुलिस विभाग भी लगातार तैनात है और लोगों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने में जुटा है।
सड़क संपर्क बहाल करने में जुटी एजेंसियां
पोटिन-पोसा संपर्क मार्ग पर कई जगह भूस्खलन की खबर सामने आई है। इसके बाद जिला प्रशासन ने भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के प्रोजेक्ट अरुणांक ने किमिन-पोटिन सड़क को 36 घंटे के भीतर फिर से बहाल कर दिया। लगातार बारिश के कारण 45 किलोमीटर लंबे सड़क मार्ग पर कई जगह बड़े नुकसान हुए थे। सड़क के हिस्से बह गए थे और कई इलाकों में मिट्टी, बड़े पत्थर और उखड़े हुए पेड़ों के कारण रास्ते बंद हो गए थे।
सड़क बंद होने से पोतिन, याजली, याचुली, जोराम और जीरो जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों का संपर्क प्रभावित हुआ। इससे आवश्यक सामान, आपातकालीन सेवाओं और नाहरलागुन स्थित टोमो रिबा इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल साइंसेज (टीआरआईएचएमएस) तक पहुंच भी प्रभावित हुई।
असम में भी बाढ़ का असर, 100 से ज्यादा परिवार प्रभावित
अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण लेकू नदी उफान पर आ गई, जिससे असम के जोनाई क्षेत्र में गंभीर बाढ़ की स्थिति बन गई। यहां 100 से ज्यादा परिवार प्रभावित हुए हैं। कई घर, खेत और पशु बाढ़ के पानी में डूब गए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार पहली बार लेकू नदी इतनी बड़ी मात्रा में गांवों में दाखिल हुई है। जोनाई उपखंड के केदिचुक समेत कई गांव जलमग्न हो गए हैं।
लेकू क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-515 (एनएच-515) पर पानी भरने से सैकड़ों वाहन फंस गए। इसके कारण असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच सड़क संपर्क पूरी तरह प्रभावित हो गया और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) ने भी एक बयान जारी कर बताया कि असम के धीमाजी जिले में 110 मिमी से अधिक बारिश के बाद बाढ़ और नदी कटाव के कारण आर्चीपाथर और सिमेन चापरी रेलवे स्टेशनों के बीच ट्रेन सेवाएं रोक दी गई हैं। बारिश के कारण एक रेलवे पुल भी प्रभावित हुआ है।
इससे पहले केमी नदी में आई तेज बाढ़ में केमी और ओयान को जोड़ने वाला करीब 300 मीटर लंबा लोहे का पुल भी बह गया था। इसके कारण केमी-पूराना जेलम क्षेत्र और जोनाई सदर के बीच संपर्क पूरी तरह टूट गया है।