नई दिल्लीः अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के दान में कथित गबन के मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को कहा कि आरोपियों को केवल कानूनी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी ने इसे हिंदू समाज की भावनाओं का प्रतिबिंब बताया।
भाजपा ने इस संदर्भ में फैजाबाद बार एसोसिएशन के उस प्रस्ताव का उल्लेख किया, जिसमें निर्णय लिया गया है कि राम मंदिर दान गबन मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों की ओर से एसोसिएशन का कोई भी सदस्य अदालत में पैरवी नहीं करेगा। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि यदि कोई वकील इस निर्णय का उल्लंघन करता है तो उस पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि यह निर्णय हिंदू समाज की भावनाओं को दर्शाता है। उनके अनुसार, अयोध्या में कथित लूट के आरोपी कानून के साथ-साथ सामाजिक बहिष्कार का भी सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग आस्था के साथ विश्वासघात करते हैं या ऐसे कृत्यों का बचाव करते हैं, उन्हें समाज का समर्थन नहीं मिलेगा।
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भंडारी ने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि तुष्टीकरण की राजनीति के कारण विपक्ष ने कई मामलों में वोट बैंक की राजनीति करते हुए आरोपियों का समर्थन किया। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी ने अयोध्या और वाराणसी विस्फोट मामलों के आरोपियों का साथ दिया था, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और दिल्ली दंगों जैसे चर्चित मामलों में आरोपियों की ओर से पैरवी की थी।
उन्होंने कहा कि हिंदू सभ्यता सदियों से सत्य और न्याय के पक्ष में खड़ी रही है और आस्था के साथ विश्वासघात करने वालों को समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा।
रविवार को ही फैजाबाद बार एसोसिएशन के वकीलों ने संकेत दिए थे कि वे इस मामले के आरोपियों की ओर से अदालत में पेश नहीं होंगे। उनका कहना था कि मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन की घटना से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। इसके बाद सोमवार को हुई एसोसिएशन की आमसभा में इस संबंध में औपचारिक प्रस्ताव पारित किया गया।
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मामले में गिरफ्तार आठ आरोपी अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, राम शंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामाशंकर उर्फ टिन्नू यादव राम मंदिर में प्राप्त नकदी और अन्य चढ़ावे की गणना से जुड़े कार्यों में लगे हुए थे। कथित गबन के आरोप में उनकी गिरफ्तारी हुई थी और उन्हें 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
बार एसोसिएशन की बैठक में वकीलों ने मंदिर प्रबंधन से जुड़े चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ भी नाराजगी जताई। हालांकि, इन तीनों के नाम प्राथमिकी में आरोपी के रूप में दर्ज नहीं हैं। बैठक में मांग की गई कि वे अयोध्या छोड़ दें। वकीलों ने चेतावनी दी कि यदि तीन दिनों के भीतर ऐसा नहीं हुआ तो अयोध्या शहर की घेराबंदी की जाएगी और किसी को भी शहर में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।