मुंबई : महाराष्ट्र के पुणे जिले में तीन वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में विशेष अदालत द्वारा दोषी को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे न्याय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण निर्णय बताते हुए कहा कि इस मामले में पुलिस की त्वरित जांच और फास्ट ट्रैक सुनवाई के कारण पीड़ित परिवार को समयबद्ध न्याय मिल सका।
सोमवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि वह अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा के लिए न्यायपालिका का आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि एक मासूम बच्ची की निर्मम हत्या हुई थी और इस मामले में दिया गया फैसला भविष्य के लिए एक मिसाल साबित होगा। उन्होंने पुलिस की तेज जांच की भी सराहना की।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि इस पूरे मामले की निगरानी स्वयं मुख्यमंत्री कर रहे थे और वह भी लगातार पुलिस अधिकारियों के संपर्क में रहे। उनके अनुसार, दिन-रात इस प्रकरण पर काम किया गया, जिसके कारण मामला तेजी से फास्ट ट्रैक अदालत में पहुंचा और दोषी को सजा मिल सकी।
उन्होंने कहा कि इस मामले में सहयोग करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद। उनका कहना था कि समाज की भी यही भावना थी कि इस जघन्य अपराध के दोषी को फांसी की सजा मिलनी चाहिए। पीड़ित बच्ची के परिवार की भी यही मांग थी।
एकनाथ शिंदे ने कहा कि उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी और उनका मानना है कि ऐसे मामलों में कठोर न्याय मिलने से अन्य बेटियों के लिए भी न्याय का संदेश जाता है। उन्होंने कहा कि अदालत ने पॉक्सो, दुष्कर्म और हत्या—तीनों मामलों में उचित निर्णय दिया है। इसके लिए उन्होंने पुलिस और न्यायालय का आभार जताया।
सोमवार को पुणे की विशेष अदालत ने तीन वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के दोषी 65 वर्षीय भीमराव कांबले को मृत्युदंड की सजा सुनाई। अदालत ने अपने फैसले में इस अपराध को अत्यंत जघन्य करार देते हुए कहा कि अपराध की गंभीरता और उसका उद्देश्य मृत्युदंड देने योग्य है।
अभियोजन के अनुसार भीमराव कांबले ने पुणे जिले के नसरापुर गांव में तीन वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दी थी। यह घटना एक मई को हुई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालत में की गई।
इससे पहले 25 जून को पुणे की विशेष अदालत ने अपने निर्णय में कहा था कि अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को संदेह से परे साबित कर दिया है। अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत आरोपी को दोषी ठहराने के बाद सजा तय करने की प्रक्रिया शुरू की थी। अभियोजन और शिकायतकर्ता पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अंतिम सजा पर फैसला सोमवार के लिए सुरक्षित रखा गया था।
विशेष लोक अभियोजक अधिवक्ता अजय मिसार ने बताया कि मुकदमे की पूरी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि अदालत ने यह माना कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर संदेह से परे सिद्ध हुए हैं और उसे सभी संबंधित धाराओं के तहत दोषी घोषित किया गया।
अधिवक्ता अजय मिसार ने यह भी बताया कि अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष सर्वोच्च न्यायालय के 12 महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला दिया था, जिनमें नाबालिगों के साथ हुए जघन्य अपराधों में मृत्युदंड की आवश्यकता और उसके सिद्धांतों पर विस्तार से चर्चा की गई है। उन्होंने कहा कि अदालत ने इन कानूनी दलीलों से सहमति जताई।
उन्होंने बताया कि इसके बाद शिकायतकर्ता पक्ष ने भी अपनी दलीलें अदालत के समक्ष रखीं। दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने सजा पर अंतिम निर्णय के लिए सुनवाई सोमवार, 29 जून तक स्थगित कर दी थी, जिसके बाद दोषी को फांसी की सजा सुनाई गई।