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पुरी में स्नान यात्रा और गजवेश के दौरान उमड़ा आस्था का जन सैलाब, लाखों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

108 कलशों से हुआ दिव्य स्नान, चतुर्देव अनासर गृह में गए, 14 दिन बाद फिर होंगे सार्वजनिक दर्शन।

By श्वेता सिंह

Jun 29, 2026 18:57 IST

पुरीः ओडिशा के पुरी स्थित 12वीं शताब्दी के श्री जगन्नाथ मंदिर में सोमवार को आस्था का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। भीषण गर्मी और उमस की परवाह किए बिना लाखों श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहनों की पवित्र स्नान यात्रा (स्नाना यात्रा) और अद्भुत गजवेश का दर्शन किया।

इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और सुदर्शन चक्र को गर्भगृह से बाहर निकालकर पारंपरिक पाहंडी यात्रा के माध्यम से स्नान मंडप पर लाया गया। शंखध्वनि और “हरि बोल” के जयकारों के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

‘ज्येष्ठ पूर्णिमा’ (देव स्नान पूर्णिमा) के अवसर पर आयोजित इस अनुष्ठान को रथ यात्रा की शुरुआत माना जाता है। मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का दिव्य स्नान कराया जाता है, जिसे अत्यंत पवित्र माना जाता है।

स्नान मंडप पर 108 कलशों से पवित्र जल द्वारा देव विग्रहों का स्नान कराया गया। इनमें भगवान जगन्नाथ पर 35, बलभद्र पर 33, देवी सुभद्रा पर 22 और सुदर्शन चक्र पर 18 कलशों का जल अर्पित किया गया।

स्नान के बाद पुरी के गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव ने परंपरा के अनुसार स्नान मंडप की प्रतीकात्मक सफाई की। इसके बाद भगवानों को विशेष गजवेश में सजाया गया, जो भगवान गणेश के स्वरूप का प्रतीक माना जाता है।

जगन्नाथ संस्कृति शोधकर्ता भास्कर मिश्रा के अनुसार इस पारंपरिक गजवेश के लिए आवश्यक सामग्री सदियों पुराने राघव दास मठ और गोपालतीर्थ मठ से उपलब्ध कराई जाती है।

शाम के समय श्रद्धालुओं को सहन मेल के दौरान स्नान मंडप पर निकट दर्शन का अवसर मिला। इसके बाद परंपरा के अनुसार भगवानों को अनासर गृह में ले जाया गया, जहां मान्यता है कि वे स्नान के बाद ‘अस्वस्थ’ हो जाते हैं और 14 दिनों तक सार्वजनिक दर्शन से दूर रहते हैं। इस अवधि में वैद्य द्वारा उनका पारंपरिक उपचार किया जाता है।

इसके बाद नवजौबन दर्शन के दिन पुनः सार्वजनिक दर्शन होंगे, जो वार्षिक रथ यात्रा से ठीक एक दिन पहले होता है।

इस अवसर पर ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, सांसदों और विधायकों ने भी स्नान मंडप में पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने प्रदेश और विश्व कल्याण की कामना की है और भगवान जगन्नाथ की कृपा से ओडिशा निरंतर प्रगति करेगा।

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने बताया कि सभी अनुष्ठान निर्धारित समय पर शांतिपूर्वक संपन्न हो रहे हैं और प्रशासन भक्तों से सहयोग की अपील कर रहा है।

सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुरी में लगभग 2,400 पुलिसकर्मी तैनात किए गए। पुलिस अधिकारियों के अनुसार भीड़ नियंत्रण और गर्मी से राहत के लिए जल छिड़काव जैसी व्यवस्थाएं की गईं, फिर भी कुछ श्रद्धालु गर्मी और उमस से प्रभावित हुए। कुछ स्थानों पर बैरिकेड तोड़ने की कोशिशें भी हुईं, जिन्हें तुरंत नियंत्रित कर लिया गया।

जिला प्रशासन ने बताया कि भीड़ प्रबंधन और सुविधाओं के लिए सभी विभागों को सक्रिय किया गया है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

इसी दौरान मुख्यमंत्री ने गजपति महाराजा से मुलाकात की और आगामी रथ यात्रा के लिए रथ निर्माण कार्य का भी निरीक्षण किया।

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