तेहरान : ईरान के कथित सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने इजरायल और अमेरिका के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की कड़ी चेतावनी देते हुए अंतरराष्ट्रीय अदालत में मामला ले जाने की बात कही है। उन्होंने यह भी मांग की है कि युद्ध में हुए नुकसान को लेकर मुआवजा दिया जाए। उनका कहना है कि दोनों देशों की कार्रवाई को न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में लाया जाना चाहिए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रविवार को किए गए पोस्ट में मोजतबा खामेनेई ने कहा कि युद्ध के दौरान हुई घटनाओं की अंतरराष्ट्रीय अदालत में निष्पक्ष सुनवाई होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल के नेताओं के सार्वजनिक बयान स्वयं उनके अपराधों की स्वीकारोक्ति के समान हैं और ये बयान भविष्य में कानूनी सबूत के रूप में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि इज़रायल और अमेरिका के शीर्ष नेताओं ने कई मौकों पर ऐसे बयान दिए हैं, जिनसे यह स्पष्ट होता है कि वे हमलों की जिम्मेदारी अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार करते हैं। उनके अनुसार यह सभी बयान अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में ईरान के पक्ष में मजबूत साक्ष्य बन सकते हैं।
मोजतबा खामेनेई ने यह भी कहा कि ईरान पर हुए हर हमले की जांच और न्यायिक कार्रवाई होनी चाहिए तथा इसके लिए मुआवजे की मांग भी की जाएगी। उनके अनुसार, युद्ध से जुड़े सभी सार्वजनिक बयान और दावे अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था में न्याय और क्षतिपूर्ति के आधार बन सकते हैं।
इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने इराक दौरे के दौरान कहा कि अगले 30 दिनों तक होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरी तरह ईरान का नियंत्रण रहेगा और इस दौरान किसी भी अन्य देश को हस्तक्षेप की अनुमति नहीं होगी। उन्होंने इराकी नेतृत्व के साथ अमेरिका के साथ हुए समझौते और युद्धविराम की स्थिति पर भी चर्चा की।
उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह सक्रिय और सुरक्षित बनाए रखने की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि 30 दिन बाद स्थिति क्या होगी। चेतावनी के लहजे में उन्होंने कहा कि किसी भी बाहरी हस्तक्षेप से तनाव बढ़ सकता है और कार्यों में देरी हो सकती है।
दूसरी ओर, होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद को सुलझाने के लिए मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों की उच्चस्तरीय बैठक होने जा रही है। इस बैठक में समुद्री मार्ग और क्षेत्रीय विवादों के समाधान पर चर्चा की जाएगी।
युद्ध की पृष्ठभूमि में यह भी बताया गया है कि संघर्ष की शुरुआत के पहले दिन इज़रायल और अमेरिका की संयुक्त सेना ने कथित रूप से ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई को मार गिराया था। इसके बाद लगभग दो महीने तक युद्ध चलता रहा, जिसमें बच्चों और बुजुर्गों सहित कई आम नागरिकों की मौत हुई।