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अमेरिका-ईरान तनाव से डगमगाया बाजार, बिकवाली के दबाव में सेंसेक्स-निफ्टी फिसले

आईटी, ऑटो और ऑयल शेयरों में बिकवाली से बाजार पर दबाव, बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई।

By श्वेता सिंह

Jun 29, 2026 17:34 IST

मुंबईः सप्ताह के पहले कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ। अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़े तनाव तथा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। इसके साथ ही आईटी, ऑटो और ऑयल एंड गैस शेयरों में मुनाफावसूली और बिकवाली के दबाव से प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए।

बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 372.10 अंक यानी 0.48 प्रतिशत गिरकर 76,728.37 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 478.72 अंक तक फिसलकर 76,621.75 अंक के निचले स्तर पर पहुंच गया। दूसरी ओर, एनएसई का निफ्टी 109.75 अंक यानी 0.46 प्रतिशत टूटकर 23,946.25 अंक पर बंद हुआ।

बाजार की व्यापक तस्वीर भी कमजोर रही। बीएसई पर 2,629 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 1,712 शेयरों में बढ़त रही और 218 शेयर बिना किसी बदलाव के बंद हुए।

ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक कंपनी एनरिच मनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पोनमुडी आर. ने कहा कि सप्ताहांत में अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव बढ़ने से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बना। हालांकि दोनों देशों ने बातचीत फिर शुरू करने और संघर्ष रोकने पर सहमति जताई, लेकिन समझौते की स्थिरता को लेकर आशंकाएं बनी हुई हैं, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव का जोखिम कायम है।

सेंसेक्स में सबसे बड़ी गिरावट कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर में रही, जो 3.24 प्रतिशत टूट गया। कंपनी द्वारा यह जानकारी दिए जाने के बाद कि प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अशोक वासवानी 31 दिसंबर 2026 को कार्यकाल पूरा होने के बाद दोबारा नियुक्ति नहीं लेंगे, निवेशकों ने शेयर में बिकवाली की।

इसके अलावा महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति सुजुकी, इंटरग्लोब एविएशन, अल्ट्राटेक सीमेंट और लार्सन एंड टुब्रो के शेयर भी दबाव में रहे। वहीं इटरनल, ट्रेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और एनटीपीसी के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। बीएसई स्मॉलकैप सेलेक्ट इंडेक्स 0.65 प्रतिशत और मिडकैप सेलेक्ट इंडेक्स 0.60 प्रतिशत नीचे बंद हुए।

वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.51 प्रतिशत बढ़कर 73.09 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जिससे ऊर्जा आयात करने वाले देशों के लिए महंगाई और लागत बढ़ने की आशंका मजबूत हुई।

रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (रिसर्च) अजीत मिश्रा ने कहा कि निवेशक एक ओर अमेरिका-ईरान वार्ता से राहत की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं पश्चिम एशिया में ताजा सैन्य घटनाक्रम ने जोखिम की आशंकाओं को बढ़ा दिया है। इसके अलावा आईटी कंपनियों से जुड़े अधिग्रहण संबंधी घटनाक्रम और कुछ बैंकों में नेतृत्व परिवर्तन की खबरों ने भी बाजार पर दबाव डाला।

एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि जापान का निक्केई 225, शंघाई एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग बढ़त में रहे। यूरोपीय बाजारों में भी शुरुआती कारोबार के दौरान कमजोरी देखी गई। अमेरिकी बाजार शुक्रवार को मामूली गिरावट के साथ बंद हुए थे।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में 383.76 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी। इससे पहले गुरुवार को सेंसेक्स 109.25 अंक और निफ्टी 34.35 अंक की बढ़त के साथ बंद हुए थे।

(समाचार एई समय कहीं भी निवेश करने की सलाह नहीं देता है। शेयर बाजार या किसी भी निवेश में जोखिम होता है। निवेश से पहले पूरी जानकारी और विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है। यह खबर केवल शिक्षा और जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।)

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