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दंगे और हिंसा रोकने के लिए बंगाल का नया कानून, विधानसभा से मिली हरी झंडी

दंगे और हिंसा रोकने के उद्देश्य से विधानसभा ने पारित किया जन सुरक्षा विधेयक, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से वसूली का भी प्रावधान।

By श्वेता सिंह

Jun 29, 2026 17:59 IST

कोलकाताः पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था को और सख्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। विधानसभा ने सोमवार को 'पश्चिम बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026' पारित कर दिया। इस विधेयक में असामाजिक गतिविधियों में संलिप्त लोगों के खिलाफ बिना मुकदमा चलाए अधिकतम 12 महीने तक निवारक नजरबंदी (प्रिवेंटिव डिटेंशन) का प्रावधान किया गया है।

विधानसभा में इस विधेयक को बहुमत से मंजूरी मिली। मतदान के दौरान 176 विधायकों ने इसके पक्ष में, जबकि 42 सदस्यों ने विरोध में मतदान किया। वहीं 20 विधायक मतदान से अनुपस्थित या तटस्थ रहे।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सदन में विधेयक का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य में दंगों, हिंसक घटनाओं और अन्य असामाजिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए मौजूदा कानूनी प्रावधान पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान कानूनों में ऐसी स्पष्ट व्यवस्था नहीं है, जिसके तहत हिंसा के दौरान सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों से क्षतिपूर्ति की जा सके। नए विधेयक में ऐसी घटनाओं में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल लोगों से नुकसान की भरपाई कराने का भी प्रावधान किया गया है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कानून आम नागरिकों के खिलाफ नहीं, बल्कि गुंडा तत्वों और असामाजिक गतिविधियों में शामिल लोगों पर कार्रवाई के लिए बनाया गया है। सरकार ने सदन को आश्वस्त किया कि इस कानून का किसी भी परिस्थिति में राजनीतिक विरोधियों या अन्य निर्दोष लोगों के खिलाफ दुरुपयोग नहीं किया जाएगा।

सरकार का कहना है कि राज्य में बढ़ती हिंसक घटनाओं और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं को देखते हुए कड़े कानूनी उपायों की आवश्यकता महसूस की गई। इसी उद्देश्य से यह विधेयक तैयार किया गया है, ताकि हिंसा की आशंका वाले मामलों में समय रहते कार्रवाई की जा सके और कानून-व्यवस्था बनाए रखी जा सके।

हालांकि, बिना मुकदमा चलाए लंबे समय तक नजरबंदी के प्रावधान को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलकों में बहस तेज होने की संभावना है। विपक्षी दलों ने विधानसभा में इस प्रावधान पर आपत्ति जताई, जबकि सरकार का कहना है कि यह कानून केवल सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने और असामाजिक तत्वों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए लाया गया है।

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