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वडोदरा में चौथा वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस शुरू, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने निवेश पर दिया जोर

वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस 2026: मध्य गुजरात बनेगा वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब, सीएम का बड़ा बयान

वडोदरा : गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सोमवार को वडोदरा में केंद्रीय गुजरात क्षेत्र के लिए चौथे संस्करण के वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (वीजीआरसी) का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने इसे राज्य के औद्योगिक विकास को गति देने और मध्य गुजरात को वैश्विक विनिर्माण एवं नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने सभी क्षेत्रों में तेज प्रगति की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की दूरदर्शी सोच और नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन ने देश के आर्थिक और औद्योगिक विकास को नई गति दी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री के संतुलित विकास के दृष्टिकोण को अपनाते हुए वाइब्रेंट गुजरात पहल को केवल वैश्विक शिखर सम्मेलन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे क्षेत्रीय स्तर तक विस्तारित किया है ताकि जिलों की औद्योगिक क्षमताओं और निवेश अवसरों को प्रदर्शित किया जा सके।

उन्होंने कहा कि वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस केवल निवेश मंच नहीं है, बल्कि यह स्थानीय उद्योगों को वैश्विक अवसरों से जोड़ने का एक मजबूत सेतु है। उन्होंने उद्योगपतियों और निवेशकों से अपील की कि वे विचारों को परियोजनाओं में और परियोजनाओं को समृद्धि में बदलें।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बताया कि केंद्रीय गुजरात के दस जिलों को शामिल करने वाला यह सम्मेलन क्षेत्र में नए निवेश अवसर और साझेदारियां पैदा करेगा। उन्होंने कहा कि यह मंच संतुलित विकास का नया मॉडल प्रस्तुत करता है, जिसमें विकेंद्रीकृत औद्योगिक विकास पर जोर दिया गया है।

उन्होंने बताया कि इससे पहले आयोजित तीन संस्करणों—मेहसाणा, राजकोट और सूरत—में लगभग 13.30 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव 9,499 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) के माध्यम से प्राप्त हुए थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वडोदरा पेट्रोकेमिकल्स, विशेष रसायन, इलेक्ट्रिक वाहन उपकरण और एयरोस्पेस निर्माण का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जिसमें टाटा एयरबस सी-295 विमान परियोजना भी शामिल है। वहीं आनंद जिला अमूल ब्रांड के माध्यम से भारत के डेयरी क्षेत्र को मजबूत कर रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू हुई वाइब्रेंट गुजरात पहल ने राज्य को निवेश के लिए पसंदीदा गंतव्य बना दिया है। उन्होंने कहा कि आज गुजरात “भविष्य का वैश्विक द्वार” बन चुका है।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि निवेशकों का भरोसा स्थिर नीतियों, बुनियादी ढांचे और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति पर आधारित होता है, और गुजरात ने इन सभी क्षेत्रों में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।

उन्होंने कहा कि देश की बिजली मांग इस वर्ष 271 गीगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची, जिसे सफलतापूर्वक पूरा किया गया और भविष्य की मांग को देखते हुए 300 गीगावाट तक की तैयारी की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि गुजरात 50 गीगावाट से अधिक ग्रीन एनर्जी क्षमता के साथ देश में अग्रणी है।

आवास क्षेत्र पर जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) और पीएमएवाई 2.0 के तहत 1.27 करोड़ से अधिक घरों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 98.6 लाख घर पूरे कर लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं। इनमें से 11.5 लाख से अधिक घर गुजरात में स्वीकृत हुए हैं।

गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने कहा कि वाइब्रेंट गुजरात अब केवल निवेश सम्मेलन नहीं, बल्कि वैश्विक साझेदारी और नवाचार का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने कहा कि मध्य गुजरात राज्य के कुल विनिर्माण उत्पादन में लगभग 28 प्रतिशत योगदान देता है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में इस क्षेत्र से 20.5 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के निर्यात हुए हैं। यहां 65 से अधिक औद्योगिक विकास निगम (जीआईडीसी) एस्टेट हैं, जिनमें 24,000 से अधिक औद्योगिक प्लॉट सक्रिय हैं।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने 20 वर्षीय केंद्रीय गुजरात आर्थिक मास्टर प्लान तैयार किया है, जिसके तहत छोटा उदेपुर को खेल उपकरण निर्माण केंद्र और वडोदरा को देश का सबसे बड़ा बायोइकोनॉमी हब बनाने की योजना है।

उन्होंने यह भी बताया कि नई औद्योगिक नीति 2026 के तहत अगले पांच वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपये के नए निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यक्रम में वरिष्ठ मंत्री, मुख्य सचिव एम. के. दास, विभिन्न देशों के राजदूत, उद्योग प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में निवेशक एवं उद्यमी उपस्थित रहे।

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