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'आधुनिक हिंदी साहित्य में पारिस्थितिक चिंतन' पर मंथन, कवियों की रचनाओं ने बांधा समां

रिसड़ा में आयोजित शब्द साधना की मासिक गोष्ठी में साहित्यकारों ने पुस्तक की उपयोगिता पर रखे विचार, काव्यपाठ से देर तक गूंजता रहा सभागार।

By श्वेता सिंह

Jun 29, 2026 23:06 IST

रिसड़ाः साहित्यिक संस्था 'शब्द साधना' की मासिक गोष्ठी का आयोजन हुगली जिले के रिसड़ा स्थित इस्कार्ट सभागार में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार चंद्रिका प्रसाद पाण्डेय अनुरागी ने की। पहले सत्र में प्रो. श्वेता रस्तोगी की पुस्तक 'आधुनिक हिंदी साहित्य में पारिस्थितिक चिंतन' पर परिचर्चा हुई, जबकि दूसरे सत्र में काव्य गोष्ठी ने साहित्य प्रेमियों को भाव-विभोर कर दिया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कवि पांडेय निडर, मुख्य वक्ता डॉ. राहुल शर्मा तथा विशिष्ट वक्ता एवं पुस्तक की लेखिका प्रो. श्वेता रस्तोगी (आचार्य जगदीश चंद्र बोस महाविद्यालय) उपस्थित रहीं। कार्यक्रम संयोजक शिवम तिवारी ने स्वागत भाषण दिया और राम पुकार गाजीपुरी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम का शुभारंभ कराया।

मुख्य वक्ता डॉ. राहुल शर्मा ने कहा कि 'आधुनिक हिंदी साहित्य में पारिस्थितिक चिंतन' एक महत्वपूर्ण आलोचनात्मक कृति है, जिसमें कहानी, उपन्यास और कविता जैसी विभिन्न साहित्यिक विधाओं के माध्यम से पर्यावरणीय चिंतन का व्यापक विश्लेषण किया गया है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध होगी।

पुस्तक की लेखिका प्रो. श्वेता रस्तोगी ने बताया कि अलग विषय पर शोध करने की इच्छा ने उन्हें इस पुस्तक के लेखन के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न पुस्तकालयों में लंबे अध्ययन और शोध के बाद यह कृति तैयार हो सकी।

दूसरे सत्र की शुरुआत युवा रचनाकार शिवम तिवारी ने अपनी कविता "बहुत परेशान करती हैं, वो अलिखित कविताएं" से की, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।

मोहन चतुर्वेदी बैरागी ने ब्रज भाषा का विरह गीत प्रस्तुत किया, जबकि मीनाक्षी सांगानेरिया ने स्त्री विमर्श पर आधारित कविता सुनाई। रीमा पांडेय ने अपनी गजल से खूब वाहवाही बटोरी।

राम पुकार गाजीपुरी ने वंदे मातरम् पर आधारित ओजपूर्ण ग़ज़ल सुनाकर देशभक्ति का भाव जगाया। प्रख्यात ग़ज़लकार रणजीत भारती ने कृष्ण भक्ति पर आधारित रचना प्रस्तुत की। मुख्य अतिथि पांडेय निडर ने अपनी कविता से श्रोताओं का मन जीत लिया।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे डॉ. शिव प्रकाश दास ने भी अपनी रचना सुनाई। अध्यक्षीय काव्यपाठ में चंद्रिका प्रसाद पाण्डेय अनुरागी ने अपनी कविता प्रस्तुत कर गोष्ठी को यादगार बना दिया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में सत्य प्रकाश पाण्डेय, साधना तिवारी, सुधा चौधरी और ओजस्विता सिंह का विशेष सहयोग रहा। दोनों सत्रों का संचालन डॉ. शिव प्रकाश दास ने किया। अंत में संस्था के महामंत्री राम पुकार सिंह ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों और उपस्थित श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

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