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भारतीय अर्थव्यवस्था में पूरी तरह सुधारः प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा

AI और डिजिटल डेटा को बताया बेहतर निर्णय का आधार। AI का जिम्मेदारी के साथ उपयोग किया जाएगा तो नीति निर्माण की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी बन सकेगी।

By डॉ. अभिज्ञात

Jun 29, 2026 22:22 IST

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था अब केवल शुरुआती सुधार (ग्रीन शूट्स) के संकेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी तरह पुनर्जीवित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि हालिया तिमाही और वार्षिक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं कि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में लौट आई है।

जीडीपी आंकड़ों का दिया हवाला

राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के 20वें आयोजन के दौरान एएनआई से बातचीत में पी.के. मिश्रा ने कहा कि नवीनतम तिमाही और वार्षिक जीडीपी आंकड़े अर्थव्यवस्था में मजबूत सुधार को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत अब "ग्रीन शूट्स" के दौर से काफी आगे निकल चुका है। जब उनसे पूछा गया कि क्या भारतीय अर्थव्यवस्था में अभी केवल शुरुआती सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था इससे कहीं आगे बढ़ चुकी है और अब पूरी तरह पुनर्जीवित हो चुकी है।

वैश्विक तनाव के बावजूद जताया भरोसा

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और उसके भारतीय अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव से जुड़े सवाल पर पी.के. मिश्रा ने कहा कि मौजूदा जीडीपी आंकड़े स्पष्ट रूप से बताते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती के साथ वापसी की है।

विकसित भारत के लिए डेटा आधारित नीति जरूरी

पी.के. मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल योजनाएं बनाने से पूरा नहीं होगा, बल्कि प्रत्येक निर्णय डेटा और प्रमाण आधारित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की हर पहल, हर योजना और हर नीति को तथ्यात्मक आंकड़ों के आधार पर तैयार किया जाना चाहिए। इसके लिए विभिन्न संकेतकों को मापना, प्रगति का आकलन करना और विश्वसनीय डेटा का उपयोग करना बेहद आवश्यक है।

प्रशासनिक डेटा के बेहतर उपयोग पर जोर

इस वर्ष के राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस की थीम 'निर्णय लेने के लिए प्रशासनिक डेटा की क्षमता को अनलॉक करना' है। इस विषय पर मिश्रा ने कहा कि आज विभिन्न सरकारी विभागों, मंत्रालयों और देश के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) से बड़ी मात्रा में प्रशासनिक डेटा तैयार हो रहा है। चुनौती इस डेटा को मानकीकृत करने, विभिन्न प्रणालियों के अनुरूप बनाने, उससे सार्थक निष्कर्ष निकालने और उसकी गुणवत्ता बढ़ाने की है, ताकि यह विश्वसनीय, व्यापक और पारंपरिक सर्वेक्षण आधारित आंकड़ों के साथ उपयोगी साबित हो सके।

AI की भूमिका भी अहम

पी.के. मिश्रा ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया को अधिक व्यापक और प्रभावी बनाने की बड़ी क्षमता रखती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि AI का प्रभावी उपयोग करने के लिए मानव संसाधन को प्रशिक्षित करना और AI से प्राप्त परिणामों का उचित सत्यापन करना भी उतना ही जरूरी है। यदि डेटा की गुणवत्ता बेहतर होगी और AI का जिम्मेदारी के साथ उपयोग किया जाएगा तो नीति निर्माण की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी बन सकेगी।

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