वॉशिंगटनः अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अधिकारों से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्वतंत्र संघीय एजेंसियों के प्रमुखों को हटाने के राष्ट्रपति के अधिकार को व्यापक मान्यता दी है। हालांकि, फेडरल रिजर्व के मामले में अदालत ने अलग रुख अपनाते हुए फेड गवर्नर लिसा कुक को फिलहाल पद पर बने रहने की अनुमति दी है।
सुप्रीम कोर्ट के छह न्यायाधीशों के बहुमत ने माना कि संघीय एजेंसियों के प्रमुखों को हटाने पर कानूनी सुरक्षा देना संविधान में निहित शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के अनुरूप नहीं है। अदालत ने इस फैसले के साथ 91 वर्ष पुराने 'हम्फ्रीज़ एग्जीक्यूटर' फैसले की उस व्याख्या को भी सीमित कर दिया, जिसने अब तक राष्ट्रपति की बर्खास्तगी की शक्ति पर अंकुश लगाया था।
मुख्य न्यायाधीश ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने फैसले में कहा कि एजेंसी प्रमुखों को हटाने से जुड़ी विशेष सुरक्षा व्यवस्था संविधान में कार्यपालिका की शक्तियों के अनुरूप नहीं है। अदालत के अनुसार राष्ट्रपति को कार्यपालिका का प्रभावी संचालन करने के लिए अपने अधीन अधिकारियों को हटाने का अधिकार होना चाहिए।
फेडरल रिजर्व को मिला अलग दर्जा
फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि अदालत ने फेडरल रिजर्व को अन्य एजेंसियों से अलग माना। पांच-चार के बहुमत से कोर्ट ने कहा कि लिसा कुक को फिलहाल पद से नहीं हटाया जा सकता। उनकी बर्खास्तगी को चुनौती देने वाली याचिका पर अंतिम निर्णय आने तक वह फेड गवर्नर बनी रहेंगी।
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाए तो राष्ट्रपति भविष्य में दोबारा उन्हें हटाने का प्रयास कर सकते हैं।
क्या है पूरा मामला?
राष्ट्रपति ट्रंप ने लिसा कुक पर वर्ष 2021 में मिशिगन और जॉर्जिया स्थित दो संपत्तियों को 'प्राथमिक निवास' बताकर मॉर्गेज से जुड़े लाभ लेने का आरोप लगाया था। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि यह गंभीर लापरवाही का मामला है और इसी आधार पर उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए।
लिसा कुक ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है और उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला भी दर्ज नहीं है। उनका कहना है कि उन्हें केवल इसलिए हटाने की कोशिश की गई क्योंकि उन्होंने ब्याज दरों पर राजनीतिक दबाव स्वीकार नहीं किया।
आलोचकों का मानना है कि ट्रंप फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति पर अधिक प्रभाव चाहते हैं। यदि लिसा कुक को हटाया जाता है तो उनकी जगह ट्रंप अपने पसंद के सदस्य की नियुक्ति कर सकते हैं, जिससे फेड बोर्ड में शक्ति संतुलन बदल सकता है।
अन्य एजेंसियों पर भी पड़ेगा असर
यह फैसला केवल फेड तक सीमित नहीं है। इसका असर फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC), नेशनल लेबर रिलेशंस बोर्ड (NLRB), मेरिट सिस्टम्स प्रोटेक्शन बोर्ड और कंज्यूमर प्रोडक्ट सेफ्टी कमीशन जैसी कई स्वतंत्र एजेंसियों पर भी पड़ेगा। इन संस्थाओं के प्रमुखों को हटाने के राष्ट्रपति के अधिकार को अदालत ने मान्यता दी है।
फैसले के बाद ट्रंप ने इसे राष्ट्रपति के अधिकारों से जुड़ा ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए स्वागत किया। वहीं, न्यायमूर्ति सोनिया सोटोमयोर ने असहमति जताते हुए कहा कि इस फैसले से राष्ट्रपति की शक्ति पहले से कहीं अधिक बढ़ जाएगी और इससे संस्थागत स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है